लूनी नदी

September 18, 2018
लूनी नदी
👉लूनी नदी का उद्गम स्थल-
➯राजस्थान के अजमेर जिले की नाग पहाड़ी से लूनी नदी का उद्गम होता है।
➯लूनी नदी के उद्गम स्थल पर लूनी नदी को सागरमती नदी के नाम से जाना जाता है।
➯राजस्थान के अजमेर जिले की गोविन्दगढ़ नामक जगह के निकट पुष्कर से आने वाली सरस्वती नदी में लूनी नदी मिलने के बाद लूनी नदी को लूनी नदी के नाम से जाना जाता है।
➯लूनी नदी अजमेर की नाग की पहाड़ियों से सरस्वती तथा सागरमती नामक दो धाराओं या नदियों के नाम से निकलती है।
➯लूनी नदी पुर्णतया बरसाती नदी है।

👉लूनी नदी का बहाव क्षेत्र-
➯लूनी नदी राजस्थान के अजमेर जिले से निकलकर दक्षिणी पश्चिमी राजस्थान- नागौर, पाली, जोधपुर, बाड़मेर, जालोर आदि जिलों में से बहते हुए गुजरात के कच्छ जिले में प्रवेश करती है तथा कच्छ के रन में विलुप्त हो जाती है।
➯लूनी नदी का बहाव क्षेत्र पश्चिमी राजस्थान एवं दक्षिणी-पश्चिमी राजस्थान की ओर है।
➯राजस्थान के जालोर जिले में लूनी नदी के बहाव क्षेत्र को नेड़ा या रेल कहते है।

👉गोडवाड़ प्रदेश-
➯लूनी नदी का प्रवाह क्षेत्र गोडवाड़ प्रदेश कहलाता है।

👉लूनी नदी के उपनाम या अन्य नाम-
1. लवण्वती नदी (प्राचीन नाम)
2. सागरमती नदी
3. मरूआशा नदी
4. साक्री नदी
5. लवणाद्रि नदी
6. लवणावरी नदी
7. मारवाड़ की गंगा या मारवाड़ की जीवन रेखा
8. रेगिस्तान की गंगा या मरूस्थल की गंगा
9. पश्चिमी राजस्थान की गंगा
10. अन्तः सलिला नदी
11. आधि मीठी व आधि खारी नदी

👉अन्तः सलिला नदी-
➯कालीदास ने लूनी नदी को अन्तः सलिला नदी कहा है।

👉पुष्कर घाटी-
➯राजस्थान के अजमेर जिले की पुष्कर घाटी में लूनी नदी को साक्री नदी के नाम से जाना जाता है।

👉लूनी नदी की लम्बाई-
➯लूनी नदी की कुल लम्बाई 495 किलोमीटर है जिसमें से राजस्थान में लूनी की कुल लम्बाई 330 किलोमीटर है।

👉पश्चिमी राजस्थान-
➯लूनी नदी पश्चिमी राजस्थान की प्रमुख नदी मानी जाती है।

👉आधि खारी व आधि मीठी नदी-
➯लूनी नदी भारत तथा राजस्थान की एकमात्र ऐसी नदी है जो आधि खारी व आधि मिठी नदी है।
➯लूनी नदी का आधा भाग खारा तथा आधा भाग मीठा होने के कारण ही लूनी नदी को आधि खारी तथा आधि मीठी नदी कहते है।
➯राजस्थान के बाड़मेर जिले की बालोतरा तहसील के आसोतरा गांव तक लूनी नदी का पानी मीठा होता है तथा बाड़मेर जिले की बालोतरा तहसील के आसोतरा गांव के बाद लूनी नदी का पानी खारी हो जाता है।
➯लूनी नदी के खारे होने का मुख्य कारण बाड़मेर की पंचभद्रा झील तथा थार के मरुस्थल की मिट्टी की लवणीयता को माना जाता है।

👉लूनी नदी की सहायक नदियां-
➯राजस्थान में सर्वाधिक सहायक नदियों वाली नदी लूनी नदी है।
➯अरावली की पहाड़ियों से निकल कर लूनी नदी में बायीं ओर से मिलने वाली सहायक नदियां- सूकड़ी नदी, मीठड़ी नदी, बाण्डी नदी, खारी नदी, जवाई नदी, लीलड़ी नदी, गुहिया नदी तथा सागी नदी आदि नदियां है।
➯लूनी नदी में दायीं ओर से मिलने वाली एकमात्र नदी जोजड़ी है।
➯लूनी नदी की सबसे बड़ी सहायक नदी जवाई नदी है।
➯लूनी नदी की सहायक नदी जोजड़ी एकमात्र ऐसी नदी है जिसका उद्गम अरावली पर्वतमाला से नहीं होता है।

👉बालोतरा (बाड़मेर)-
➯पुष्कर (अजमेर) की पहाड़ियों में अधिक वर्षा होने के कारण राजस्थान के बाड़मेर जिले की बालोतरा तहसील में बाढ़ आ जाती है। क्योकी बालोतरा में लूनी नदी का पाट अत्यधिक चौड़ा तथा आसपास के धरातल के समतलीय है।

👉लूनी नदी का समापन-
➯लूनी नदी का समापन गुजरात में स्थित कच्छ की खाड़ी (कच्छ का रन) में होता है तथा लूनी नदी का मुहाना भी गुजरात में स्थित कच्छ की खाड़ी में है।



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राजस्थान की प्रमुख नदियां

September 18, 2018
राजस्थान की अपवाह प्रणाली - महत्वपूर्ण तथ्य
👉नदियों के भाग-
➯राजस्थान में प्रवाह की दृष्टि से नदियों को तीन भागों में बाटा गया है। जैसे-
1. अरब सागर में गिरने वाली नदियां
2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां
3. आन्तरिक प्रवाह वाली नदियां

1. अरब सागर में गिरने वाली नदियां-
➯वे नदियां जिनका जल अरब सागर में गिरता है अरब सागर में गिरने वाली नदियां कहलाती है।
➯माही नदी, सोम नदी, जाखम नदी, साबरमती नदी, पश्चिमी बनास, लूनी आदि नदियां अरब सागर में गिरने वाली नदियां है।

2. बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां-
➯वे नदियां जिनका जल बंगाल की खाड़ी में गिरता है बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां कहलाती है।
➯चम्बल नदी, बनास नदी, काली सिंध नदी, पार्वती नदी, खारी नदी, बेड़च नदी, गंभीरी नदी आदि नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरने वाली नदियां है।

3. आन्तरिक प्रवाह वाली नदियां-
➯वे नदियां जिनका उद्गम राजस्थान से होता है तथा उन नदियों का समापन भी राजस्थान में ही होता है आन्तरिक प्रवाह वाली नदियां कहलाती है।
➯आन्तरिक प्रवाह की सबसे लम्बी नदी घग्घर नदी है।
➯घग्घर नदी, साबी नदी, काकनी नदी, काटली नदी, मन्था नदी, बांडी नदी आदि नदियां आन्तरिक प्रवाह वाली नदियां है।

👉अरावली पर्वतमाला-
➯राजस्थान में अधिकतम नदियां अरावली पर्वतमाला से निकलती है इसीलिए अरावली पर्वतमाला राजस्थान में जल विभाजन का कार्य करती है। क्योकि अरावली पर्वतमाला के पूर्व में से निकलने वाली नदियां बंगाल की खाड़ी में गिरती है तथा अरावली पर्वतमाला के पश्चिम में से निकलने वाली नदियां अरब सागर में गिरती है।

👉उदयपुर-
➯राजस्थान में सर्वाधिक नदियों वाला जिला उदयपुर है।

👉बीकानेर तथा चूरू-
➯राजस्थान में बीकानेर तथा चूरू दो मात्र ऐसे जिले है जिनमें एक भी नदी नही बहती है।

👉चित्तौड़गढ़-
➯राजस्थान में सर्वाधिक नदियों का उद्गम चित्तौड़गढ़ जिले से होता है।
➯चित्तौड़गढ़ से कुल 13 नदियों का उद्गम होता है।

👉सांचौर (जालोर)-
➯राजस्थान का पंजाब सांचौर (जालोर) को कहते है।

👉कोटा संभाग-
➯राजस्थान में सर्वाधिक नदियों वाला संभाग कोटा संभाग है।

👉बीकानेर संभाग-
➯राजस्थान में सबस कम नदियों वाला संभाग बीकानेर संभाग है।

👉पश्चिमी राजस्थान-
➯राजस्थान में दिशा की दृष्टि से सर्वाधिक नदियां पश्चिमी राजस्थान में पाई जाती है।
➯पश्चिमी राजस्थान की सबसे लम्बी नदी लूनी नदी है।

👉दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान-
➯राजस्थान में दिशा की दृष्टि से सबसे कम नदियां दक्षिणी-पूर्वी राजस्थान में पाई जाती है।

👉चम्बल नदी-
➯राजस्थान की सबसे लम्ब नदी चम्बल नदी है।
➯चम्बल नदी की कुल लम्बाई 965 किलोमीटर है जिसमें से चम्बल नदी राजस्थान में 135 किलोमीटर बहती है।
➯अंतर्राज्यीय सीमा बनाने वाली राजस्थान की एकमात्र नदी चम्बल नदी है।

👉चम्बल नदी, बनास नदी, लूनी नदी-
➯राजस्थान में सर्वाधिक जिलों में से बहने वाली नदी चम्बल नदी, बनास नदी व लूनी नदी है ये तीनों नदियां 6-6 जिलों में से बहती है।

👉बनास नदी-
➯पूर्णतः बहाव की दृष्टि से राजस्थान की सबसे लम्बी नदी बनास नदी है।
➯बनास नदी की कुल लम्बाई 480 किलोमीटर है।



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राजस्थान की प्रमुख नदियां राजस्थान की प्रमुख नदियां Reviewed by asdfasdf on September 18, 2018 Rating: 5

राजस्थान की प्रमुख हवेलियां

September 17, 2018
राजस्थान की प्रमुख हवेलियां - महत्वपूर्ण तथ्य
👉जैसलमेर-
➯राजस्थान में जैसलमेर को हवेलियों का नगर कहते है।
➯पत्थरों की कटाई एवं जालियों लिए प्रसिद्ध हवेलियां जैसलमेर की है।
➯जैसलमेर में पटवों की हवेलियों को सतखंडा हवेली कहा जाता है।
➯जैसलमेर में स्थित सालिम सिंह की हवेली को नौ खंड हवेली कहते है।
➯सालिम सिंह की हवेली की दो ऊपरी मंजिले लकड़ी से बनी हुई थी इन दो मंजिलों को जहाज महल कहा जाता था।
➯जैसलमेर में स्थित दीवान नथमल की हवेली दो सगे भाईयों हाथी तथा लालू को द्वारा बनवाई गई थी।

👉बीकानेर-
➯लाल पत्थरों से निर्मित हवेलियां बीकानेर में स्थित है।
➯बीकानेर स्थित रामपुरिया की हवेली में हिंदू मुस्लिम यूरोपीय कला का मिश्रण है।

👉जोधपुर-
➯जोधपुर की हवेलियों में स्थापत्य कला की बारीकियों का प्रयोग हुआ है।

👉शेखावाटी-
➯शेखावाटी की हवेलियां चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯शेखावाटी को ओपन आर्ट गैलरी कहा जाता है।
➯नवलगढ़ को शेखावाटी की स्वर्ण नगरी कहा जाता है।
➯नवलगढ़ की हवेलीयां सोने की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯महनसर (झुन्झुनू) की हवेली सोने चांदी की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯कृष्ण लीला के भित्ती चित्रों के लिए सहजाराम पोद्दार की हवेली प्रसिद्ध है।

👉पोल या दयोड़ी-
➯हवेलियों के मुख्य द्वार को पोल या दयोड़ी कहते है।

👉गवाक्ष-
➯हवेलियों के मुख्य द्वार के दोनों ओर स्थित चबूतरों को गवाक्ष कहते है।

👉राजस्थान की प्रमुख हवेलियां-
जैसलमेर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पटवों की हवेलीजैसलमेर
2सालिम सिंह की हवेलीजैसलमेर
3दीवान नथमल की हवेलीजैसलमेर
बीकानेर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1डागा की हवेलीबीकानेर
2कोठारी की हवेलीबीकानेर
3रामपुरिया की हवेलीबीकानेर
4बच्छावतों की हवेलीबीकानेर
5मोहता की हवेलीबीकानेर
जोधपुर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पुष्य हवेलीजोधपुर
2पच्चिसां हवेलीजोधपुर
3पाल हवेलीजोधपुर
4बड़े मियां की हवेलीजोधपुर
5पोकरण की हवेलीजोधपुर
6राखी हवेलीजोधपुर
7लालचन्द ढड्डा की हवेली(फलौदी) जोधपुर
झुन्झुनू की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पोद्दार की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
2बघेरियां या भगेरिया की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
3भगतों की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
4ईसरदास मोदी की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
5लालधर जी धरकाजी की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
6रामदेव चौखाणी की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
7सागरमल लाड़िया की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
8रामनाथ गोयनका की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
9सेठ जयदयाल केडिया की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
10नाथूराम पोद्दार की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
11सीताराम सिगतिया की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
12सेठ हीराराम बनारसी लाल की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
13सोने चांदी की हवेलीमहनसर (झुन्झुनू)
14बीरला हवेलीपिलानी (झुन्झुनू)
15मेहनसर की हवेलीझुन्झुनू
16टीबड़ेवाला की हवेलीझुन्झुनू
सीकर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पंसारी की हवेलीश्रीमाधोपुर (सीकर)
2केडिया एवं राठी की हवेलीलक्ष्मणगढ़ (सीकर)
3सहजा राम पोद्दार की हवेलीफतेहपुर (सीकर)
4बिनाणियों की हवेलीसीकर
5बैजनाथ रुइया की हवेलीरामगढ़ (सीकर)
6खेमका तथा गोयनका सेठों की हवेलियांरामगढ़ (सीकर)
चूरू की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1सुराणों के हवामहल या सुराणों की हवेलीचूरू
2रामविलास गोयनका की हवेलीचूरू
3मालजी का कमराचूरू
4मंत्रियों की मोटी हवेलीचूरू
जयपुर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पुरोहीतजी की हवेलीजयपुर
2चूरसिंह की हवेलीजयपुर
3रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेलीजयपुर
अन्य प्रमुख हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1मोहनसिंह जी की हवेलीउदयपुर
2बागोर की हवेलीउदयपुर
3सुनहरी कोठी हवेलीटोंक
4बड़े देवता की हवेलीकोटा
5झाली की हवेलीकोटा
6सोनी जी की सलियांअजमेर
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राजस्थान की प्रमुख हवेलियां राजस्थान की प्रमुख हवेलियां Reviewed by asdfasdf on September 17, 2018 Rating: 5

राजस्थान में जनजातीय आंदोलन

September 16, 2018
राजस्थान में जनजाति आंदोलन
👉जनजातीय आंदोलन का उद्देश्य-
➯राजस्थान में जनजातीय आंदोलन का मुख्य उद्देश्य आदिवासियों को सामाजिक रूप से उन्नत करना था।

👉दयानंद सरस्वती-
➯राजस्थान में सामाजिक सुधार आंदोलनों का जनक दयानंद सरस्वती को माना जाता है।
➯दयानंद सरस्वती नें सन् 1883 में परोपकारिणी सभा नामक संगठन बनाया।

1. भगत आंदोलन-
➯राजस्थान में जनजातियों के प्रभाव क्षेत्र दक्षिणी राजस्थान में आदिवासियों के सामाजिक सुधार के लिए सुरजी भगत ने आंदोलन प्रारम्भ किया जिसे भगत आंदोलन कहा जाता है।
➯भगत आंदोलन का वास्तविक जनक गोविंद गिरी था।
➯गोविंद गिरी दयानंद सरस्वती का आदिवासी शिष्य था।
➯भगत आंदोलन का नेतृत्व गोविंद गिरी ने किया था।
➯गोविंद गिरी का जन्म सन् 1858 में राजस्थान के डुंगरपुर जिले के बांसिया गांव में एक बंजारे के घर में हुआ था।
➯गोविंद गिरी ने दयानंद सरस्वती से आशीर्वाद लेकर दक्षिणी जनजातीय क्षेत्र में भगत आंदोलन को नई दिशा दी।
➯भगत आंदोलन को नई दिशा देने के लिए गोविंद गिरी ने सन् 1883 में राजस्थान के सिरोही जिले में सम्प सभा की स्थापना की।
➯भगत आंदोलन का वास्तविक जनक गोविंद गिरी को कहते है।
➯गोविंद गिरी को सामाजिक सुधार आंदोलन का नेतृत्व करने के कारण गुरू कहा जाने लगा था।
➯गुरू गोविंद गिरी ने भगत आंदोलन को आगे बढ़ाने के लिए राजस्थान के बांसवाड़ा जिले में मानगढ़ पहाड़ी पर कार्यस्थल या कार्यक्षेत्र बनाया था।
➯सम्प सभा का प्रथम वार्षिक अधिवेशन 7 दिसम्बर, 1908 को बांसवाड़ा जिले की मानगढ़ पहाड़ी पर आयोजित किया गया था।
➯सम्प सभा का दूसरा वार्षिक अधिवेशन 7 दिसम्बर 1913 को बांसवाड़ा जिले की मानगढ़ पहाड़ी पर आयोजित किया गया था।
➯सम्प सभा के दूसरे वार्षिक अधिवेशन में कर्नल शैटर्न के नेतृत्व में मेवाड़ भील कौर के सैनिकों ने गोलीबारी की जिसमें लगभग 1500 भील मारे गए तथा गुरू गोविंद गिरी को गिरफ्तार कर लिया गया था।
➯मानगढ़ पहाड़ी कि इस गोलिबारी घटना को मानगढ़ हत्याकांड कहते है।
➯गुरू गोविंद गिरी ने अपना अंतिम समय कम्बोई (गुजरात) में व्यतित किया था।
➯गुरू गोविंद गिरी का समाधि स्थल राजस्थान के बांसवाड़ा जिले की मानगढ़ पहाड़ी पर बना हुआ है।
➯राजस्थान सरकार का पर्यटन विभाग गुरू गोविंद गिरी समाधि स्थल को मानगढ़ धाम नाम से पर्यटन के लिए विकसित कर रहा है।
➯भगत आंदोलन का उद्देश्य भीलों को मौलिक अधिकारों के प्रति जागरूक करना तथा भील समाज में व्याप्त कुरीतियों को दूर करना था।
➯गुरू गोविंद गिरी का गीत "भूरटिया नी मानू रे नी मानू" आज भी भील क्षेत्र में प्रचलित है।

2. एकी आंदोलन या भोमट भील आंदोलन (1921)-
➯एकी आंदोलन या भोमट भील आंदोलन का नेतृत्व मोतीलाल तेजावत द्वारा किया गया था।
➯एकी आंदोलन या भोमट भील आंदोलन का उद्देश्य भीलों में एकता स्थापित करना था।
➯एकी आंदोलन या भोमट भील आंदोलन की शुरुआत राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जले के मातृकुंडिया धाम में हुई थी।
➯एकी आंदोलन का कार्यस्थल चित्तौड़गढ़ जिले के मातृकुंडिया धाम को बनाया गया था।
➯एकी आंदोलन के तहत पहली आम सभा झाड़ोल (उदयपुर) में हुई थी।
➯एकी आंदोलन का प्रभाव क्षेत्र भोमट का पठारी भाग था इसी कारण एकी आंदोलन को भोमट आंदोलन भी कहा जाता है।
➯भीलों ने मोतीलाल तेजावत के नेतृत्व में 7 मार्च, 1922 को राजस्थान के अजमेर जिले के नीमड़ा गांव में भील सभा का आयोजन किया था।
➯7 मार्च, 1922 की नीमड़ा गांव की भील सभा पर मेवाड़ भील कौर के सैनिकों ने गोलीबारी की जिसमें लगभग 1200 भील मारे गए तथा इस गोलीबारी कांड को नीमड़ा हत्याकांड कहते है।
➯सन् 1929 में गांधी जी के कहने पर मोतीलाल तेजावत ने अंग्रेजों के सामने आत्मसमर्पण कर दिया तथा सन् 1945 तक जेल में रहे थे।
➯मोतीलाल तेजावत को आदिवासियों का मसीहा तथा भीलों का संत मावजी कहते है।
➯राजस्थान के चित्तौड़गढ़ जिले में स्थित मातृकुंडिया धाम को राजस्थान तथा मेवाड़ा का हरिद्वार कहते है।

3. मीणा आंदोलन या मीणा जनजाति आंदोलन-
➯मीणा आंदोलन जयपुर के आसपास रहने वाले मीणा जनजाति के द्वारा चलाया गया आंदोलन था।
➯मीणा जनजाति के दो भाग माने जाते है-
1. जमीदार मीणा
2. चौकीदार मीणा
➯सन् 1924 में ब्रिटिश सरकार ने क्रिमिनल ट्राइब्स एक्ट/अधिनियम/ कानून पारित किया।
➯क्रिमिनल ट्राइब्स अधिनियम के अन्तर्गत सन् 1930 में जयपुर राज्य जयराम पेशा कानून बनाया गया था।
➯जयराम पेशा कानून के अन्तर्गत 12 वर्ष से अधिक आयु के सभी मीणा युवकों को यह आदेश दिया गया की उन्हें प्रतिदिन थाने में उपस्थिति दर्ज करानी होगी।
➯जयराम पेशा कनून को समाप्त करने के लिए 1933 में मीणा क्षेत्रीय महासभा की स्थापना की गई।
➯सन् 1944 में नीम का थाना (सीकर) में मीणाओं की महासभा हुई इस सभा की अध्यक्षता जैन मुनि मगन सागर ने की थी।
➯इस सभा के दौरान सन् 1944 में मीणा समाज में जागृति के लिए मीणा राज्य सुधार समिति का गठन किया गया था।
➯मीणा राज्य सुधार समिति का अध्यक्ष पंडित बंशीधर शर्मा को बनाया गया था।
➯चौकीदार मीणाओं को एक टैक्स या हर्जाना देना पड़ता था चाहे चोरी कोई भी करे हर्जाना चौकीदार मीणाओं को ही देना पड़ता था इसी को दादरसी कानून कहा जाता था।
➯सन् 1945 में मीणाओं का राज्यव्यापी आंदोलन चला।
➯28 अक्टूबर 1946 को मीणाओं ने मुक्ति दिवस के रूप में मनाया था।
➯सन् 1952 में क्रिमिनल ट्राइब्स तथा जयराम पेशा कानून रद्द कर दिये गये और मीणाओं को अपने मूलभूत अधिकारों की प्राप्ति हुई।



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राजस्थान में जनजातीय आंदोलन राजस्थान में जनजातीय आंदोलन Reviewed by asdfasdf on September 16, 2018 Rating: 5

भारत की जलीय सीमा

September 13, 2018
👉भारत की जलीय सीमा या भारत की समुद्री सीमा या भारत की तटवर्ती सीमा-
👉भारत की जलीय सीमा की लम्बाई-
➯भारत की जलीय सीमा की कुल लम्बाई या वास्तविक लम्बाई 7516.6 किलोमीटर है।
➯7516.6 किलोमीटर लम्बी जलीय सीमा भारत के कुल 9 राज्यों तथा 4 केन्द्रशासित प्रदेशों को लगती है।

👉भारत की जलीय या समुद्री सीमा को छूने वाले 9 राज्य-
1. गुजरात
2. अांध्र प्रदेश
3. तमिलनाडु
4. महाराष्ट्र
5. केरल
6. ओडिशा
7. कर्नाटक
8. पश्चिम बंगाल
9. गोवा

👉गुजरात-
➯भारत में सबसे लम्बी समुद्री सीमा वाला राज्य गुजरात है तथा गुजरात के बाद दूसरा सबसे कम जलीय सीमा वाला राज्य आंध्र प्रदेश है।
➯गुजरात के साथ कुल 1214.70 किलोमीटर लम्बी समुद्री सीमा लगती है।
➯आंध्र प्रदेश के साथ कुल 973.12 किलोमीटर लम्बी जलीय सीमा लगती है।

👉सर्वाधिक जलीय सीमा या समुद्री सीमा वाले 4 राज्य (क्रमशः)-
1. गुजरात
2. अांध्र प्रदेश
3. तमिलनाडु
4. महाराष्ट्र

👉गोवा-
➯भारत में सबसे कम जलीय सीमा या समुद्री सीमा वाला राज्य गोवा है तथा गोवा के बाद दूसरा सबसे कम जलीय सीमा वाला राज्य पश्चिम बंगाल है।
➯गोवा के साथ कुल 101 किलोमीटर लम्बी जलीय सीमा लगती है।
➯पश्चिम बंगाल के साथ कुल 157 किलोमीटर लम्बी जलीय सीमा लगती है।

👉सबसे कम जलीय सीमा या समुद्री सीमा वाले 4 राज्य (क्रमशः)-
1. गोवा
2. पश्चिम बंगाल
3. कर्नाटक
4. महाराष्ट्र

👉गुजरात तथा पश्चिम बंगाल-
➯गुजरात तथा पश्चिम बंगाल भारत के दो मात्र ऐसे राज्य है जो की जलीय एवं स्थलीय दोनों सीमा बनाते है।

👉पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा म्यामार-
➯पाकिस्तान, बांग्लादेश तथा म्यामार तीनों देश भारत के साथ जलीय एवं स्थलीय दोनों सीमा बनाते है।

👉मुख्य भूमि जलीय सीमा-
➯भारत की मुख्य भूमि (9 राज्यों के साथ) जलीय सीमा रेखा की कुल लम्बाई 6100 किलोमीटर है।

👉जलीय या समुद्री सीमा वाले 4 केन्द्रशासित प्रदेश-
1. अण्डमान निकोबार
2. लक्ष द्वीप
3. पांडिचेरी
4. दमन द्वीप

👉अण्डमान निकोबार-
➯भारत में सर्वाधिक लम्बी जलीय सीमा वाला केन्द्रशासित प्रदेश अण्डमान निकोबार है तथा अण्डमान निकोबार के बाद दूसरे स्थान पर सबसे लम्बी जलीय सीमा वाला केन्द्रशासित प्रदेश लक्ष द्वीप है।
➯अण्डमान निकोबार के साथ कुल 1962 किलोमीटर लम्बी जलीय सीमा लगती है।

👉दमन द्वीप-
➯भारत में सबसे कम लम्बी जलीय सीमा वाला केन्द्रशासित प्रदेश दमन द्वीप है तथा दमन द्वीप के बाद सबसे कम लम्बी जलीय सीमा वाला केन्द्रशासित प्रदेश पांडिचेरी है।

👉भारतीय तट रक्षक बल-
➯भारतीय तट रक्षक बल की स्थापना सन् 1977 में हुई थी।
➯भारत में जलीय सीमा की सुरक्षा व निगरानी रखने का कार्य भारतीय तट रक्षक बल का है।
➯भारतीय तट रक्षक बल का प्रधान मुख्यालय मुम्बई में स्थित है।

👉5 राज्य-
➯भारत में कुल 5 राज्य ऐसे है जो न तो जलीय सीमा बनाते है और न ही स्थलीय सीमा बनाते है जैसे-
1. हरियाणा
2. मध्य प्रदेश
3. छत्तीसगढ़
4. झारखण्ड
5. तेलंगाना

👉श्रीलंका-
➯श्रीलंका भारत का सबसे नजदीकी समुद्री पड़ोसी देश है जो की तमिलनाडु से मात्र 96 किलोमीटर दूरी पर स्थित है।
➯श्रीलंका का प्राचीन नाम सिंहली द्वीप या सिलोन द्वीप है।
➯श्रीलंका की राजधानी कोलम्बो थी वर्तमान में श्रीलंका ने दिसम्बर 2015 में अपनी नई राजधानी जयवर्धनापुरा कोट्टी को बनाया है।
➯वर्तमान में श्रीलंका की प्रशासनिक राजधानी जयवर्धनापुरा कोट्टी है।
➯वर्तमान में श्रींलका की व्यापारिक राजधानी कोलम्बो है।

👉मन्नार की खाड़ी-
➯मन्नार की खाड़ी भारत की सबसे दक्षिणतम खाड़ी है।
➯मन्नार की खाड़ी भारत तथा श्रीलंका को जोड़ती है।

👉बंगाल की खाड़ी-
➯बंगाल की खाड़ी भारत की सबसे बड़ी खाड़ी है।

👉हड़सन की खाड़ी-
➯हड़सन की खाड़ी विश्व की सबसे बड़ी खाड़ी है जो की अमेरिका तथा कनाडा को जोड़ती है।

👉कच्छ की खाड़ी-
➯कच्छ की खाड़ी भारत की सबसे पश्चिमी खाड़ी है।

👉पाक की खाड़ी-
➯पाक की खाड़ी भारत तथा श्रीलंका को जोड़ती है।
➯पाक की खाड़ी का नामकरण मद्रास के गवर्नर राॅबर्ट पाक के नाम पर किया गया है।
➯वर्तमान में मद्रास का नया नाम चेन्नई है।

👉आदम का पुल या सेतु-
➯आदम के पुल को एडम्स ब्रिज तथा रामसेतु भी कहते है।
➯आदम का पुल रामसेतु पुल के उपर बनाया गया है।
➯आदम का पुल तमिलनाडु में मन्नार की खाड़ी में स्थित है।
➯आदम का पुल भारत तथा श्रीलंका को जोड़ता है।

👉इंडोनेशिया-
➯श्रीलंका के बाद भारत के दूसरा निकटतम पड़ोसी देश इंडोनेशिया है।
➯इंडोनेशिया इंदिरा गांधी पाॅइंट (अण्डमान निकोबार) से 106 कलोमीटर दूरी पर स्थित है।
➯विश्व में सर्वाधिक मुस्लिम आबादी वाला देश इंडोनेशिया है।
➯इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता है।
➯इंडोनेशिया लगभग 12,000 से ज्यादा द्वीपों या टापुओं से बना है इसीलिए इंडोनेशिया को द्वीपों का देश या टापुओं का देश कहते है।
➯आसियान संगठन का मुख्यालय इंडोनेशिया की राजधानी जकार्ता में स्थित है।
➯आसियान संगठन की स्थापना 8 अगस्त 1967 को की गई थी।
➯आसियान संगठन में वर्तमान में कुल 10 सदस्य देश है जिसमें भारत भी शामिल है।

👉8 डिग्री चैनल-
➯8 डिग्री चैनल मिनिकाॅय (लक्ष द्वीप) को मालद्वीप से जोड़ता है।

👉9 डिग्री चैनल-
➯9 डिग्री चैनल कवारत्ती (लक्ष द्वीप) को मिलिकाॅय (लक्ष द्वीप) से जोड़ता है।

👉10 डिग्री चैनल-
➯10 डिग्री चैनल अण्डमान को निकोबार से जोड़ता है।

👉कोको स्ट्रेट-
➯कोको स्ट्रेट कोको द्वीप (म्यामार) को अण्डमान (भारत) से जोड़ता है।

👉पाक स्ट्रेट-
➯पाक स्ट्रेट तमिलनाडु (भारत) को श्रीलंका से जोड़ता है।

👉ग्रेट चैनल-
➯सुमात्रा द्वीप (इंडोनेशिया) को इंदिरा गांधी पाॅइंट (भारत) से जोड़ता है।

👉डक्कन स्ट्रेट-
➯डक्कन स्ट्रेट लघु अण्डमान को निकोबार से जोड़ता है।



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भारत की जलीय सीमा भारत की जलीय सीमा Reviewed by asdfasdf on September 13, 2018 Rating: 5

भारत में कृषि के प्रकार

September 11, 2018
👉कृषि के प्रकार-
1एपीकल्चरमधुमक्खी पालन
2सेरीकल्चररेशम कीट पालन
3पिसीकल्चरमत्स्य/ मछली पालन
4विटीकल्चरअंगूरों की कृषि
5वर्मीकल्चरकेंचुए का पालन
6होर्टीकल्चरउद्यान/ बागवानी कृषि
👉केंचुआ-
➯पृथ्वी पर प्राकृतिक या जैविक खाद का सबसे अच्छा स्त्रोत केंचुए को ही माना जाता है इसीलिए केंचुए को किसान का मित्र तथा पृथ्वी का पुत्र भी कहते है।

👉बाॅम्बिक्स मोराई-
➯बाॅम्बिक्स मोराई नामक कीट से रेशम प्राप्त होता है।

👉लेसिफर लक्का-
➯लेसिफर लक्का नामक कीट से लाख प्राप्त होता है जिससे लाख के खिलोने तथा चूड़ियाँ बनायी जाती है।

👉एपिस डोरसेटा-
➯एपिस डोरसेटा मधुमक्खी डंक मारने वाली मधुमक्खी होती है।

👉रानी मधुमक्खी-
➯रानी मधुमक्खी केवल सहद देती है।

👉झूमिंग कृषि-
➯झूमिंग कृषि पर्यावरण के लिए हानिकारक मानी जाती है इसीलिए झूमिंग कृषि पुर्णतः प्रतिबंधित कृषि है।
➯झूमिंग कृषि पहाड़ों में स्थान बदल बदल कर की जाती है इसीलिए इसे स्थानान्तरित कृषि भी कहते है।
➯भारत में झूमिंग कृषि मुख्यतः उत्तरी-पूर्वी राज्यों जैसे- असोम, नागालैंड, मणिपुर आदि में की जाती है।

👉झूमिंग कृषि के उपनाम या अन्य नाम-

👉दाजिया/वालरा/चिमाता कृषि-
➯राजस्थान में झूमिंग कृषि को दाजिया/ वालरा/ चिमाता कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉झूमिंग/ झुम कृषि-
➯असोम या पूर्वी राज्यों में झूमिंग कृषि को झुम कृषि / झूमिंग के नाम से जाना जाता है।

👉ओणम कृषि-
➯केरल तथा कर्नाटक में झूमिंग कृषि को ओणम कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉तुंग्या/ टुंग्या कृषि-
➯म्यामार में झूमिंग कृषि को तुंग्या कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉चेना कृषि-
➯श्रीलंका में झूमिंग कृषि को चेना कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉मिल्पा कृषि-
➯मैक्सिको (अमेरिका) में झूमिंग कृषि को मिल्पा कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉रोका कृषि-
➯ब्राजील में झूमिंग कृषि को रोका कृषि के नाम से जाना जाता है।

👉लदांग कृषि-
➯इंडोनेशिया तथा मलेशिया में झूमिंग कृषि को लदांग के नाम से जाना जाता है।

👉फसलों के प्रकार-
1. रबी की फसल
2. खरीफ की फसल
3. जायद की फसल

1. रबी की फसल-
➯रबी की फसल का समय मुख्यतः अक्टूबर में बोकर अप्रैल तक काट ली जाती है।
➯गेहूं, चना, मटर, सरसों, राई आदि रबी फसले  सिंचाई से तैयार होने वाली फसले है।

2. खरीफ की फसल-
➯खरीफ की फसल का समय मुख्यतः जुलाई में बोकर अक्टूबर तक काट ली जाती है।
➯चावल, ज्वार, बाजरा, मक्का, जूट, मूंगफली, कपास, सन, तंबाकू आदि फसले खरीफ की फसले है।

3. जायद की फसल-
➯जायद की फसल का समय मुख्यतः मार्च में बोकर जून तक काट ली जाती है।
➯सब्जिया, तरबूज, खरबूजा, ककड़ी, खीरा, करेला आदि फसले जायद की फसले है।

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भारत में कृषि के प्रकार भारत में कृषि के प्रकार Reviewed by asdfasdf on September 11, 2018 Rating: 5

भारत में कृषि की प्रमुख क्रांतियां

September 11, 2018
भारत की प्रमुख कृषि क्रांतियां
1. हरित क्रांति-
(अ) विश्व में हरित क्रांति
(ब) भारत में हरित क्रांति

(अ) विश्व में हरित क्रांति-
➯हरित क्रांति विश्व की प्रथम कृषि क्रांति मानी जाती है।
➯विश्व में हरित क्रांति सन् 1960 में मेक्सिको (अमेरिका) से शुरू की गई थी।
➯हरित क्रांति गेहूं तथा चालव की फसल से संबंधित है।

👉डाॅ. नाॅर्मन बोरलाॅग-
➯डाॅ. नाॅर्मन बोरलाॅग मेक्सिको (अमेरिका) के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक थे जिनको विश्व हरित क्रांति का जनक कहते है।

👉गेहूं तथा चावल-
➯विश्व में हरित क्रांति गेहूं एवं चावल के लिए की गई थी लेकिन सर्वाधिक सफल चावल की फसल में हुई थी।

👉मनीला (फिलीपींस)-
➯देशों की दृष्टि से हरित क्रांति का जनक फिलीपींस को कहते है क्योकि चावल के रूप में हरित क्रांति सर्वाधिक फिलीपींस में सफल हुई थी।
➯फिलीपींस की राजधानी मनीला में अंतर्राष्ट्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र स्थित है।

👉कटक (ओडिशा)-
➯कटक (ओडिशा) में केन्द्रीय चावल अनुसंधान केन्द्र स्थित है।

👉नोबेल पुरस्कार-
➯कृषि के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार पाने वाला पहला व अंतिम वैज्ञानिक डाॅ. नाॅर्मन बोरलाॅग था।
➯डाॅ. नाॅर्मन बोरलाॅग को सन् 1970 में समाज सेवा/शांति के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार मिला था।

👉नाॅर्मन बोरलाॅग पुरस्कार-
➯नार्मन बोरलाॅग पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में प्रतिवर्ष मे मेक्सिको (अमेरिका) में दिया जाता है।
➯नार्मन बोरलाॅग पुरस्कार कृषि के क्षेत्र में विश्व का सबसे बड़ा पुरस्कार है।
➯नार्मन बोरलाॅग पुरस्कार की शुरूआत सन् 1973 में मेक्सिको (अमेरिका) में हुई थी।
➯नाॅर्मन बोरलाॅग पुरस्कार पाने वाला भारत का प्रथम व्यक्ति डाॅ. एम.एस. स्वामीनाथन है।
➯नाॅर्मन बोरलाॅग पुरस्कार पाने वाली भारत की प्रथम महिला डाॅ. अमृता पटेल है।

(ब) भारत में हरित क्रांति-
➯डाॅ. एम.एस. स्वामीनाथन-
➯डाॅ.एम.एस. स्वामीनाथन केरल के प्रसिद्ध कृषि वैज्ञानिक थे।
➯डाॅ.एम.एस. स्वामीनाथन ने सन् 1966-67 में उत्तर प्रदेश के पंतनगर से हरित क्रांति की शुरूआत की थी।
➯डाॅ.एम.एस. स्वामीनाथन को भारतीय हरित क्रांति का जनक कहते है।

👉गेहूं तथा चावल-
➯भारत में हरित क्रांति गेहूं तथा चावल की फसल के लिए चलाई गई थी लेकिन भारत में हरित क्रांति चावल के रूप में सर्वाधिक सफल हुई थी।

👉पंजाब-
➯भारत में हरित क्रांति सर्वाधिक पंजाब राज्य में सफल हुई थी।

2. भारत में श्वेत क्रांति-
➯श्वेत क्रांति को आॅपरेशन फ्लड के नाम से भी जाना जाता है।
➯श्वेत क्रांति की शुरूआत सन् 1970 में दूध के उत्पादन को बढ़ाने के उद्देश्य से की गई थी।

👉डाॅ. वर्गीस कुरियन-
➯डाॅ. वर्गीस कुरियन को भारतीय श्वेत क्रांति का जनक कहते है।

👉आणंद डेयरी /आनंद डेयरी-
➯आनंद डेयरी गुजरात में स्थित है।
➯आनंद डेयरी को वर्तमान में अमूल डेयरी के नाम से जाना जाता है।
➯आनंद डेयरी से ही भारत में श्वेत क्रांति की शुरूआत हुई थी।
➯अमूल डेयरी विश्व की सबसे बड़ी डेयरी है।

👉सरस डेयरी-
➯सरस डेयरी राजस्थान की सबसे बड़ी डेयरी है।
➯सरस डेयरी राजस्थान के जयपुर जिले में स्थित है।

👉करनाल (हरियाणा)-
➯राष्ट्रीय डेयरी अनुसंधान केन्द्र हरियाणा के करनाल जिले में स्थित है।

👉दूध उत्पादन-
➯विश्व में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला देश भारत है।
➯भारत में सर्वाधिक दूध उत्पादन करने वाला राज्य राजस्थान है।
➯विश्व में पैकिंग दूध में प्रथम स्थान गुजरात का है।

3. भारत में नीली क्रांति-
➯नीली क्रांति मत्सय या मछली उत्पादन से संबंधित है।
➯मछली के तेल में विटामिन-A,D,E,K सर्वाधिक मात्रा में पाये जाते है।
➯भारत में मृगल मछली, रोहू मछली तथा कतला मछली सर्वाधिक पायी जाती है।
➯भारत में मछली खाने के लिए सर्वाधिक उपयोग झींगा मछली का ही किया जाता है।
➯भारत में मछलियों का सर्वाधिक उत्पादन कर्नाटक राज्य से होता है।

👉मुम्बई (महाराष्ट्र)-
➯केन्द्रीय मछली अनुसंधान केन्द्र मुम्बई में स्थित है।

4. भारत में लाल क्रांति-
➯लाल क्रांति मांस तथा टमाटर से संबंधित है।
➯मांस में सर्वाधिक मात्रा में फेरस/लौहा/आयरन पाया जाता है।
➯भारत में मांस का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश तथा महाराष्ट्र राज्यों में होता है।
➯भारत में टमाटर का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य महाराष्ट्र है।

5. भारत में गोल क्रांति-
➯गोल क्रांति आलू से संबंधित है।
➯आलू में सर्वाधिक मात्रा में पोटेशियम पाया जाता है।
➯भारत में आलू का सर्वाधिक उत्पादन उत्तर प्रदेश राज्य में होता है।
➯भारत में प्रति हेक्टेयर आलू का सर्वाधिक उत्पादन महाराष्ट्र राज्य में होता है।
➯भारत में सर्वाधिक मात्रा में बोई जाने वाली तथा उत्पादित होने वाली सब्जी आलू ही है।
➯भारत में आलू तथा तंबाकू लाने का श्रेय पुर्तगालियों को दिया जाता है।
➯आलू मूल रूप से स्वीडन देश की देन है।

6. भारत में पीली क्रांति-
➯पीली क्रांति तिलहन फसलों से संबंधित है तथा तिलहन फसलों में भी सरसों की फसल से संबंधिक है।
➯प्रमुख तिलहन फसल सरसों ही है।
➯तिलहन फसलों में सबसे बड़ा बीज अरण्डी फसल का होता है।
➯भारत में तिलहन फसलों का सर्वाधिक उत्पादन करने वाला राज्य राजस्थान है।
➯सूरजमुखी एक तिलहन फसल है जिसे सदाबहार फसल कहते है।

7. भारत में गुलाबी क्रांति-
➯गुलाबी क्रांति झींगा मछली तथा प्याज से संबंधित है।
➯विश्व में प्याज का सर्वाधिक उत्पादन चीन से होता है।
➯भारत में प्याज का सर्वाधिक उत्पादन नाशिक (महाराष्ट्र) से होता है।
➯विश्व की सबसे बड़ी प्याज मंडी नाशिक (महाराष्ट्र) में है।

8. भारत में सुनहरी क्रांति-
➯सुनहरी क्रांति फलों से संबंधित है तथा फलों में भी मुख्यतः सेव से संबंधित है।
➯भारत में सर्वाधिक सेवों का उत्पादन हिमाचल प्रदेश से होता है।
➯भारत में सर्वाधिक फल उत्पादन करने वाले राज्य हिमाचल प्रदेश तथा महाराष्ट्र है।
➯भारत में सर्वाधिक मात्रा में उत्पादित होने वाला फल केला है।
➯केले का सर्वाधिक उत्पादन केरल तथा कर्नाटक राज्यों में होता है।

9. भारत में रजत क्रांति या सिल्वर क्रांति-
➯रजत क्रांति अण्डों से संबंधित है।

10. भारत में भूरी क्रांति-
➯भूरी क्रांति खाद्य या उर्वरक से संबंधित है।

11. भारत में प्रोटीन क्रांति-
➯प्रोटीन क्रांति दलहन से संबंधित है।

12. भारत में इंद्रधनुष क्रांति-
➯इंद्रधनुष क्रांति सभी क्रांतियों का सयुक्त रूप है।
➯भारत सरकार ने 2008 में सभी क्रांतियों को मिलाकर जो क्रांति चलाई थी उसे इंद्रधनुष क्रांति कहा गया था।
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