Results for भारत का इतिहास

गजनवी और गोरी

November 18, 2018

۞ सामानी राज्य के प्रान्तीय शासकों में अलप्तगीन नामक तुर्क गुलाम ने गजनी वंश की स्थापना की। ۞ 986 ई. में अलप्तगीन के दामाद तथा उसके उत्तराधिकारी सुबुक्तगीन ने हन्दूशाही शासक जयपाल को पराजित किया। ۞ 998 ई. में महमूद गजनवी गजनी का शासक बना। ۞ महमूद ने स्वयं को प्राचीन दंतकथाओं में चर्चित बादशाह अफराशियाब के वंशज होने का दावा किया। ۞ शाहनामा के लेखक फिरदौसी महमूद गजनवी के दरबारी कवि थे। ۞ महमूद गजनवी ने भारत पर 17 बार आक्रमण किया। ۞ पंजाब पर आधिपत्य जमाकर उसने नगरकोट तािा थानेश्वर पर आक्रमण किया। ۞ 1028 में कन्नौज पर तथा 1025 में गुजरात पर आक्रमण किया गया। ۞ उसने अपने साम्राज्य में इन क्षेत्रों को मिलाने का कोई प्रयास नहीं किया। ۞ सोमनाथ मन्दिर की लूट भारत में पंजाब के बाहर उसका अंतिम अभियान था। ۞ 1030 में गजनी में महमूद की मृत्यु हो गयी। ۞ महमूद के गुजरात आक्रमण के समय गुजरात का शासक भीमदेव प् था। ۞ महमूद गजनवी के साथ तहकीक-एक-हिन्द के लेखक अलबरूनी तथा इतिहासकार अरबी तथा बैहाकी भी भारत आये थे। महमूद गजनवी के आक्रमण 1000 ई. सीमा राज्य पर 1000 ई. हिन्दूशाही शासक जयपाल 1006 ई. मुल्तान 1008 ई. हिन्दूशाही शासक आनंदपाल 1009 ई. नगरकोट 1014 ई. थानेश्वर 1018 ई. कन्नौज 1019 ई. कालिंजर 1024.25 ई. सोमनाथ (गुजरातद्ध 17वां आक्रमण जाटों के विरुद्ध मुहम्मद गोरी के आक्रमण 1175 मुल्तान 1182 सिन्ध 1179 पेशावर 1185 पंजाब 1186 लाहौर 1191 तराईन का प्रथम युद्ध 1192 तराईन का द्वितीय युद्ध 1194 चंदावर का युद्ध 1204.05 बख्तियार खलजी द्वारा बंगाल विजय 1205 खोखरों की पराजय ۞ महमूद के बाद सेल्जुक आये जिसे साम्राज्य में सीरिया, ईरान तथा मावराउन्नहर शामिल थे। इस साम्राज्य ने खुरासान पर आधिपत्य के लिए गजनवियों से संघर्ष किया। ۞ एक प्रसि) युद्धमें महमूद का पुत्रा मसूद पराजित हुआ तथा उसने समारोह में शरण ली। ۞ मुहम्मद गोरी ने भारत में तुर्क राज्य की स्थापना की। ۞ तत्कालीन सिंध की राजधानी अरोर थी। ۞ गोरी का प्रथम आक्रमण 1175 में मुल्तान के विरु) हआ। ۞ 1178 में गुजरात के विरु) अभियान किया गया परन्तु चालुक्य शासक मूलराज प्प् से गोरी पराजित हुआ। ۞ 1179.89 में पंजाब पर आक्रमण किया। 1179 में पेशावर तथा 1185 में सियालकोट को जीता। ۞ 1191 में तराईन के प्रथम युद्धमें गोरी पृथ्वीराज चैहान से पराजित हुआ लेकिन 1192 में हुए द्वितीय युद्धमें चैहान पराजित हुआ। ۞ 1194 के चन्दावर युद्धमें जयचंद गोरी से पराजित हुआ। ۞ अलप्तगीन भारतीय-प्रदेश को जीतने वाला प्रथम तुर्क था।
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जैन धर्म (जैन धर्म का इतिहास)

August 24, 2018
जैन धर्म 
👉जैन शब्द का अर्थ-
➯जैन शब्द की उत्पती संस्कृत भाषा की जिन शब्द से हुई है। तथा जिन शब्द का अर्थ विजेता है। जिन शब्द जि धातु से बना है अर्थात् जिन्होंने अपने मन, वाणी और अपनी काया को जीत लिया हो वे जिन कहलाते है।

👉तीर्थंकर-
➯तीर्थंकर का अर्थ है तीर्थ की रचना करने वाला।
➯संसार सागर से मोक्ष तक के तीर्थ की रचना करने वाला तीर्थंकर कहलाता है।
➯जैन धर्म के भक्त कुल 24 तीर्थंकरों को देवताओं के रूप में पूजते है।

👉ऋषभदेव या अादिनाथ-
➯जैन धर्म की स्थापना ऋषभदेव के द्वारा की गई थी इसीलिए ऋषभदेव को जैन धर्म का संस्थापक भी कहते है।
➯ऋषभदेव जैन धर्म के प्रथम तीर्थंकर है।
➯ऋषभदेव को आदिनाथ, ऋषभनाथ, वृषभनाथ आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।
➯राजस्थान में ऋषभदेव को केसरियानाथ के नाम से जाना जाता है।
➯सांड/बुल भगवान ऋषभदेव का प्रतिक चिह्न है।
➯ऋषभदेव के पुत्र का नाम बाहुबली था।

👉बाहुबली-
➯बाहुबली भगवान ऋषभदेव के पुत्र थे।
➯बाहुबली की मूर्ति को बाहुबली की मूर्ती या गोमतेश्वर की मूर्ति भी कहते है।
➯बाहुबली की मूर्ति कर्नाटक की श्रवणबेलगोल नामक जगह पर स्थित है।
➯बाहुबली की मूर्ति का निर्माण गांगेय वंश के सम्राट गंगराज श्री रच्चमल के सेनापति (महामात्य) चामुंडराय ने करवाया था

👉अजितनाथ-
➯अजितनाथ जैन धर्म के दूसरे तीर्थंकर है।
➯हाथि जैन धर्म के तीर्थंकर अजितनाथ का प्रतिक चिह्न है।

👉पार्श्वनाथ-
➯पार्श्वनाथ जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर है।
➯सर्प जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ का प्रतिक चिह्न है।
➯पार्श्वनाथ को जैन धर्म का ऐतिहासिक संस्थापक कहा जाता है।
➯जैन धर्म के ग्रंथों में पार्श्वनाथ का नाम 'निगंठनाथ' है।
➯पार्श्वनाथ का जन्म उत्तर प्रदेश की वाराणसी नामक जगह पर हुआ था।
➯पार्श्वनाथ के शिष्यों को निर्ग्रन्थ कहा जाता है
➯पार्श्वनाथ को पारसनाथ जिन के नाम से भी जाना जाता है।

👉महावीर स्वामी-
➯महावीर स्वामी जैन धर्म के 24वें तथा अंतिम तीर्थंकर है।
➯महावीर स्वामी को जैन धर्म का वास्तविक संस्थापक भी कहा जाता है।
➯सिंह महावीर स्वामी का प्रतिक चिह्न है।
➯महावीर स्वामी का जन्म 599 ई.पू. में उत्तर प्रदेश के वैशाली जिले के कुण्डग्राम या कुण्डलपुर में हुआ था।
➯महावीर स्वामी के पिता का नाम राजा सिद्धार्थ व माता का नाम त्रिशला था।
➯महावीर स्वामी की पत्नी का नाम यशोदा था।
➯महावीर स्वामी की पुत्री का नाम प्रियदर्शिनी या अन्नोजा था।
➯महावीर स्वामी का जन्म जांत्रिक गोत्र में हुआ था इसीलिए महावीर स्वामी का गोत्र जांत्रिक है।
➯महावीर स्वामी को वर्धमान, आदिनाथ, अर्हत, जिन, निर्ग्रथ तथा अतिवीर आदि अन्य नामों से भी जाना जाता है।

👉कैवल्य या कैवलिन-
➯12 वर्ष 6.5 माह (लगभग 12 वर्ष) की तपस्या करने के बाद महावीर स्वामी को जम्भियग्राम नामक जगह पर ऋजुपालिका या ऋजुबालुका नदी के किनारे साल वृक्ष के नीचे ज्ञान प्राप्त हुआ था ज्ञान प्राप्त करने की इस घटना को जैन धर्म में कैवल्य या कैवलिन कहते है। अर्थात् कैवल्य ज्ञान की प्राप्ति हुई।
➯30 की आयु में महावीर स्वामी ने अपने बड़े भाई नंदिवर्धन की आज्ञा से गृह-त्याग किया था।

👉मेघकुमार-
➯महावीर स्वामी ने अपना पहला उपदेश बिहार की राजगृह नामक जगह की पितुलाचल पहाड़ी पर मेघकुमार को सुनाया था।
➯महावीर स्वामी ने अपने उपदेश अर्धमागधी भाषा में दिये थे।
➯जैन धर्म के ग्रंथों को भी अर्धमागधी भाषा में लिखा गया था इन ग्रथों को बाद में प्राकृत भाषा में लिखा गया था।

👉जमाली-
➯महावीर स्वामी का प्रथम शिष्य जमाली था।
➯जमाली रिश्ते में महावीर स्वामी का दामाद था।

👉पावापुरी (बिहार)-
➯महावीर स्वामी को 72 वर्ष की आयु में 527 ई.पू. में बिहार के नालंदा जिले की पावापुरी नामक जगह पर मृत्यु या मोक्ष प्राप्त हुआ।
➯भारत में जैन धर्म का सबसे पवित्र स्थल पावापुरी को माना जाता है।

👉जैन धर्म के 24 तीर्थंकर क्रमशः-
क्र.संतीर्थंकर का नाम
1ऋषभदेव या आदिनाथ
2अजितनाथ
3सम्भवनाथ
4अभिनन्दननाथ या अभिनन्द स्वामी
5सुमतिनाथ
6पद्मप्रभ
7सुपार्श्वनाथ
8चन्द्रप्रभु
9पुष्पदन्त या सुविधिनाथ
10शीतलनाथ
11श्रेयांसनाथ
12वासुपूज्य
13विमलनाथ
14अनन्तनाथ
15धर्मनाथ
16शान्तिनाथ
17कुन्थुनाथ
18अरनाथ या अरसनाथ
19मल्लिनाथ
20मुनिसुव्रतनाथ
21नमिनाथ
22नेमिनाथ या अरिष्टनेमि
23पार्श्वनाथ
24महावीर स्वामी या वर्धमान

👉गणधर-

➯महावीर स्वामी के शिष्यों को गणधर कहा जाता था।
➯महावीर स्वामी के कुल 11 शिष्य या गणधर थे।
➯सुधर्मन महावीर स्वामी का एकमात्र ऐसा शिष्य या गणधर था जो की महावीर स्वामी की मृत्यु के बाद जीवित बचा था।
➯सुधर्मन ने जैन धर्म का प्रचार प्रासर भी किया था।

👉आगम-
➯आगम जैन धर्म के साहित्य या ग्रंथ है। जिन्हें अंग के नाम से भी जाना जाता है।
➯जैन धर्म में कुल 12 आगम या अंग है।
➯अागम साहित्यों की रचना देवर्धिगणि क्षमाश्रमण ने की थी।

👉पूर्व-
➯पूर्व भी जैन धर्म के ग्रंथ है।
➯पूर्व जैन ग्रथों में तीर्थंकरों के सिद्धांतों का वर्णन है।

👉कल्पसूत्र-
➯कल्पसूत्र जैन धर्म के पवित्र ग्रंथ माने जाते है।
➯कल्पसूत्र जैन ग्रंथों में जैन तीर्थंकरों की जीवनी लिखी हुई है।
➯कल्पसूत्र की रचना प्रसिद्ध जैन मुनि भद्रबाहु ने की थी।

👉भगवती सूत्र-
➯भगवती सूत्र नामक जैन ग्रंथ में 16 महाजनपदों या राज्यों का वर्णन मिलता है।

👉जैन धर्म की प्रमुख सभा/ समिति/ संगीतियां-
➯जैन धर्म में कुल 2 सभाएं हुई थी। जैसे-

(1.) प्रथम जैन संगीति/ सभा/ समिति-
➯प्रथम संगीति 322 ई.पू. में पाटलिपुत्र (वर्तमान पटना) में हुई थी।
➯प्रथम संगीति का अध्यक्ष स्थूलभद्र को बनाया गया था।
➯प्रथम सभा के समय पाटलिपुत्र का शासक चन्द्रगुप्त मौर्य था।
➯जैन धर्म प्रथम सभा में ही दो भागों में विभाजित हो गया था जैसे-
(अ) श्वेताम्बर शाखा
(ब) दिगम्बर शाखा

(अ) श्वेताम्बर शाखा-
➯श्वेताम्बर शाखा की स्थापना स्थूलभद्र ने की थी।
➯श्वेताम्बर शाखा को मानने वाले जैन धर्म के गुरु हमेशा सफेद कपड़े पहनते है।

(ब) दिगम्बर शाखा-
➯दिगम्बर शाखा की स्थापना भद्रबाहु ने की थी।
➯दिगम्बर शाखा को मानने वाले जैन धर्म के गुरु नग्न अवस्था में रहते है।



(2.) द्वितीय जैन संगीति/ सभा/ समिति-
➯द्वितीय जैन सभा 512 ई. में गुजरात की वल्लभी नामक जगह पर हुई थी।
➯द्वितीय जैन सभा का अध्यक्ष देवर्धिगण क्षमाश्रमण को बनाया गया था।
➯इस सभा में जैन धर्म के ग्रंथों को अंतिम रूप से संकलित कर लिपिबद्ध किया गया था।
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सिक्ख धर्म (सिक्ख धर्म का इतिहास)

August 22, 2018
सिख धर्म (सिख धर्म का इतिहास) 
👉गुरु नानक देव
➯गुरु नानक देव सिख धर्म के प्रथम गुरु माने जाते है।
➯सिख धर्म की स्थापना 5वीं शताब्दी में गुरु नानक देव ने ही की थी इसीलिए सिख धर्म का संस्थापक गुरु नानक देव को कहते है।

👉तलवंडी (पाकिस्तान)-
➯गुरु नानक देव का जन्म सन् 15 अप्रैल 1469 को पाकिस्तान में रावी नदी के किनारे स्थित तलवंडी नामक गाँव में हुआ था।

👉लंगर प्रथा-
➯सिख धर्म में लंगर प्रथा को गुरु नानक देव ने ही शुरू किया था

👉गुरु अंगद-
➯गुरु अंगद सिख धर्म के दूसरे गुरु माने जाते है।
➯गुरु अंगद को लेहना के नाम से भी जान जाता है।
➯गुरुमुखी लिपि का आविष्कार गुरु अंगद ने ही किया था।

👉गुरु रामदास-
➯गुरु रामदास सिख धर्म के चौथे गुरु माने जाते है।
➯अकबर ने गुरु रामदास को 500 बिघा जमीन दान में दी थी।
➯अमृतसर शहर की स्थापना गुरु रामदास ने ही की थी।
➯अमृतसर शहर पंजाब में स्थित है।

👉गुरु अर्जुन देव-
➯गुरु अर्जुन देव सिख धर्म के पांचवें गुरु माने जाते है।
➯गुरु अर्जुन देव ने सिख धर्म के ग्रंथ 'आदि ग्रंथ' की रचना की थी।
➯मुगल शासक या बादशाह जहांगीर ने गुरु अर्जुन देव को फांसी पर लटका दिया था।

👉स्वर्ण मंदिर-
➯स्वर्ण मंदिर पंजाब के अमृतसर शहर में स्थित है।
➯स्वर्ण मंदिर वास्तव में गुरु हरिमन्दिर साहिब का का गुरुद्वारा है।
➯स्वर्ण मंदिर पर महाराजा रणजीत सिंह के द्वारा सोने की परत चढ़वाई गई थी।

👉आॅपरेशन ब्लू स्टार-
➯सन् 1984 में श्रीमती इंदिरा गांधी के द्वारा भिंडरवाला नामक आतंकी की फौज से स्वर्ण मंदिर को आजाद करवाने के लिए आॅपरेशन ब्लू स्टार चलाया गया था।

👉गुरु हरगोविंद सिंह-
➯गुरु हरगोविंद सिंह सिख धर्म के छठे गुरु माने जाते है।
➯गुरु हरगोविंद सिंह को सच्चा बादशाह भी कहते है।
➯गुरु हरगोविंद सिंह अपने साथ बाज को भी रखते थे।

👉गुरु हर किशन सिंह-
➯गुरु हर किशन सिंह सिख धर्म के अाठवें गुरु माने जाते है।
➯गुरु हर किशन सिंह को बाला पीर के नाम से भी जाना जाता है।

👉गुरु तेगबहादुर सिंह-
➯गुरु तेगबहादुर सिंह सिख धर्म के नौवें गुरु माने जाते है।
➯गुरु तेगबहादुर सिंह के द्वारा इस्लाम धर्म स्वीकार न करने के कारण मुगल शासक औरंगजेब ने गुरु तेगबहादुर सिंह का दिल्ली की शीशगंज नामक जगह पर सर कटवा दिया था।

👉गुरु गोविंद सिंह-
➯गुरु गोविंद सिंह सिख धर्म के दसवें तथा अंतिम गुरु माने जाते है।
➯गुरु गोविंद सिंह का जन्म पटना में हुआ था।
➯गुरु गोविंद सिंह का गुरुद्वारा महाराष्ट्र की नांदेड़ नामक जगह पर स्थित है।
➯गुरु गोविंद सिंह ने खालसा पंथ की स्थापना की थी।

👉सिख धर्म के 10 गुरु निम्नलिखित है-
क्र.संसिख गुरु का नामजन्मगुरु बनने की तिथिनिर्वाण
1गुरु नानक देव15 अप्रैल 146920 अगस्त 150722 सितम्बर 1539
2गुरु अंदग31 मार्च 15047 सितम्बर 153928 मार्च 1552
3गुरु अमरदास5 अप्रैल 147926 मार्च 15521 सितम्बर 1574
4गुरु रामदास24 सितम्बर 15341 सितम्बर 15741 सितम्बर 1581
5गुरु अर्जुन देव15 अप्रैल 15631 सितम्बर 158130 मई 1606
6गुरु हरगोविंद सिंह14 जून 159525 मई 16063 मार्च 1644
7गुरु हरराय16 जनवरी 16303 मार्च 16446 अक्टूबर 1661
8गुरु हर किशन सिंह7 जुलाई 16566 अक्टूबर 166130 मार्च 1664
9गुरु तेगबहादुर सिंह18 अप्रैल 162120 मार्च 166424 नवम्बर 1675
10गुरु गोविंद सिंह22 दिसम्बर 166611 नवम्बर 16757 अक्टूबर 1708
👉पांच ककार-
➯पांच ककार का अर्थ 'क' शब्द से प्रारम्भ होने वाली उन पांच चीजों से है जिन्हें गुरु गोविंद सिंह के द्वारा रखे गये थे।
➯सिख धर्म के सिद्धांतों के अनुसार सभी खालसा सिखों द्वारा पांच चीजे धारण किये जाते है जैसे- केश, कड़ा, कृपाण, कंघा और कच्छा आदि।
➯इन पांच चीजों के बिना खालसा वेश पूर्ण नहीं माना जाता है।
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बौद्ध धर्म (बौद्ध धर्म का इतिहास)

June 28, 2018
👉 बौद्ध धर्म का इतिहास - महत्त्वपूर्ण तथ्य-




👉 बौद्ध धर्म का संस्थापक-
✍ बौद्ध धर्म का संस्थापक या जनक महात्मा बुद्ध को माना जाता है।

👉 महात्मा बुद्ध का जन्म व जन्म स्थल-
✍ महात्मा बुद्ध का जन्म 563 ई.पू. में वैशाख पूर्णिमा के दिन नेपाल के लुम्बिनी गांव में हुआ था।

👉 सिद्धार्थ-
✍ महात्मा बुद्ध का बचपन का नाम या वास्तविक नाम सिद्धार्थ था।

👉 पिता-
✍ महात्मा बुद्ध के पिता का नाम शुद्धोधन था।

👉 माता-
✍ महात्मा बुद्ध की माता का नाम महामाया था।

👉 गौतमी-
✍ महात्मा बुद्ध की माँ की मृत्यु के बाद महात्मा बुद्ध का लालन-पालन उनकी मौसी गौतमी ने किया था।
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भारत में 1857 की क्रांति

June 27, 2018
👉 भारत में 1857 की क्रांति - महत्त्वपूर्ण तथ्य-




👉 गवर्नर जनरल-
✍ 1857 की क्रांति के समय भारत का गवर्नर जनरल लार्ड कैनिंग था।

👉 प्रधानमंत्री-
✍ 1857 की क्रांति के समय इंग्लैंड का प्रधानमत्री लार्ड पामस्टर्न था।

👉 मुगल शासक-
✍ 1857 की क्रांति के समय भारत का मुगल शासक बहादुर शाह जफर या बहादुर शाह द्वितीय था।

👉 प्रतिक चिह्न-
✍ 1857 की क्रांति का प्रतिक चिह्न कमल का फुल तथा रोटी था।

👉 भारत में 1857 की क्रांति के प्रमुख कारण-
1. 1857 की क्रांति का धार्मिक कारण-
✍ भारत में 1857 की क्रांति का सबसे बड़ा व प्रमुख कारण धार्मिक कारण को माना जाता है
✍ धार्मिक कारण इसीलिए माना जाता है क्योकी एनफील्ड राइफल  में सुअर तथा गाय की चर्बी से बने कारतूस इस्तेमाल होते थे।

2. राजनीतिक कारण-
✍ भारत में 1857 की क्रांति का राजनीतिक कारण लार्ड डलहौजी की हड़प नीति को माना जाता है।

👉 लार्ड डलहौजी की हड़प नीति/ राज्य हड़प नीति-
✍ हड़प नीति को गोद निषेध नीति भी कहते है।
✍ हड़प नीति को लार्ड डलहौजी ने सन् 1848 में लागू की थी।

👉 हड़प नीति के द्वारा हड़पी गई रियासते-
1. सतारा रियासत-
✍ राज्य हड़प नीति के द्वारा लार्ड डलहौजी ने सन् 1848 में सर्वप्रथम महाराष्ट्र की सतारा रियासत को हड़पा था
✍ सन् 1848 में सतारा रियासत का शासक प्रतापसिंह भोसले था।

2. अवध रियासत-
✍ वर्तमान में अवध का नाम लखनव है।
✍ लखनव उत्तर प्रदेश में स्थित है।
✍ राज्य हड़प नीति के द्वारा कुशासन के आरोप में लार्ड डलहौजी ने सन् 1856 में अवध रियासत को हड़पा था।
✍ सन् 1856 में अवध का शासक वाजिद अली शाह था।

👉 भारत में 1857 की क्रांति की शुरुआत-
👉 बैरकपुर छावनी-
✍ 1857 की क्रांति की शुरुआत पश्चिम बंगाल की बैरकपुर छावनी से 29 मार्च 1857 को हुई थी।
✍ 29 मार्च 1857 को मंगल पांडे नामक सेनिक ने इस क्रांति की शुरुआत की थी।
✍ इस क्रांति को शुरु करने का मुख्य कारण चर्बी वाले कारतूस माने जाते है।

👉 मंगल पांडे-
✍ मंगल पांडे मूल रुप से उत्तर प्रदेश के बलिया क्षेत्र के रहने वाले थे।
✍ 1857 की क्रांति के दौरान मंगल पांडे ने अंग्रेज अधिकारी लेफ्टिनेंट बाग तथा मेजर जनरल हयूसन का गोली मारकर हत्या कर दी थी।
✍ इस हत्या के लिए 8/10 अप्रैल 1857 को मंगल पांडे को तोप से उड़ा दिया गया था।
✍ मंगल पांडे को तोप से उड़ाने के कारण बैरकपुर छावनी में 1857 की क्रांति असफल रही या दब गई थी।

👉 भारत में 1857 की वास्तविक शुरुआत-
✍ 1857 की क्रांति की वास्तविक शुरुआत उत्तर प्रदेश की मेरठ छावनी के सैनिकों द्वारा 10 मई 1857 को की गई थी।
✍ मेरठ छावनी के सैनिकों का नेतृत्व जनरल बख्त खां ने किया था।

👉 भारत में 1857 की क्रांति के प्रमुख विद्रोह स्थल-
1. झांसी (उत्तर प्रदेश)-
✍ झांसी से 1857 की क्रांति का नेतृत्व रानी लक्ष्मी बाई ने किया था।

👉 रानी लक्ष्मी बाई-
✍ रानी लक्ष्मी बाई राव गंगाधर की विधवा पत्नी थी।
✍ रानी लक्ष्मी बाई को झांसी की रानी के नाम से जाना जाता है।
✍ रानी लक्ष्मी बाई का वास्तविक नाम मणिकर्णिका था।
✍ रानी लक्ष्मी बाई को महल परी के नाम से भी जाना जाता है।

👉 जनरल हयूरोज-
✍ जनरल हयूरोज के साथ लड़ते हुए रानी लक्ष्मी बाई वीरगति को प्राप्त हुई थी।
✍ रानी लक्ष्मी बाई की मृत्यु पर जनरल हयूरोज ने यह कथन कहा था "भारतीय क्रांतिकारियों में यह सोयी हुई अकेली मर्द है। "

2. अवध (उत्तर प्रदेश)-
✍ अवध का नया नाम लखनव है।
✍ अवध से 1857 की क्रांति का नेतृत्व बेगम हजरत महल ने किया था।

👉 बेगम हजरत महल-
✍ बेगम हजरत महल वाजिद अली शाह की विधवा पत्नी थी।
✍ बेगम हजरत महल को महक परी के नाम से भी जाना जाता है।

3. फैजाबाद (उत्तर प्रदेश)-
✍ फैजाबाद से 1857 की क्रांति का नेतृत्व मौलवी अहमदुल्लाह शाह ने किया था।
✍ मौलवी अहमदुल्लाह शाह पर अंग्रेजों ने 50,000 रुपये का इनाम भी रखा था।

4. ग्वालियर (मध्य प्रेदश)-
✍ ग्वालियर से 1857 की क्रांति का नेतृत्व तात्या टोपे ने किया था।

👉 तात्य टोपे-
✍ तात्या टोपे रानी लक्ष्मी बाई का चचेरा भाई था।
✍ तात्या टोपे का वास्तविक नाम रामचन्द्र पांडुरंग था।

5. जगदीशपुर (बिहार)-
✍ जगदीशपुर से 1857 की क्रांति का नेतृत्व कुंवर सिंह ने किया था।

6. रुहेलखण्ड (उत्तर प्रदेश)-
✍ रुहेलखण्ड से 1857 की क्रांति का नेतृत्व खान बहादुर खान ने किया था।

7. इलाहाबाद (उत्तर प्रदेश)-
✍ इलाहाबाद से 1857 की क्रांति का नेतृत्व लियाकत अली खान ने किया था।

8. दिल्ली-
✍ दिल्ली से 1857 की क्रांति का नेतृत्व बहादुर शाह जफर या बहादुर शाह द्वितीय ने किया था।

9. असम/ असोम-
✍ असोम से 1857 की क्रांति का नेतृत्व मनीराम दत्त ने किया था।

10. पटना (बिहार)-
✍ पटना से 1857 की क्रांति का नेतृत्व पीर अली ने किया था।

11. कानपुर (उत्तर प्रदेश)-
✍ कानपुर से 1857 की क्रांति का नेतृत्व नाना साहब ने किया था।

👉 1857 की क्रांति पर लिखी गई प्रमुख पुस्तके-
1. स्वतंत्रता का प्रथम संग्राम-
✍ यह पुस्तक विनायक दामोदर सावरकर (वी.डी. सावरकर) द्वारा लिखी गई थी।

2. महान विद्रोह-
✍ यह पुस्तक अशोक महता के द्वारा लिखी गई थी।
✍ इस पुस्तक में अशोक महता ने क्रांति को एक राष्ट्रीय विद्रोह बताया था।
भारत में 1857 की क्रांति भारत में 1857 की क्रांति Reviewed by asdfasdf on June 27, 2018 Rating: 5

सैयद वंश

May 13, 2018
👉 सैयद वंश (दिल्ली सल्तनत)-
✍ शासन काल- 1414-1451 ई.
✍ प्रथम शासक/ संस्थापक- खिज्र खाँ
✍ अंतिम शासक- अलाउद्दीन आलम शाह

👉 खिज्र खाँ-
✍ तैमूर लंग ने भारत (दिल्ली) से लौटते वक्त अपना साम्राज्य सैनापति खिज्र खाँ को सौंप दिया था और खिज्र खाँ ने ही दिल्ली में सैयद वंश कि स्थापना की थी।

👉 खिज्राबाद-
✍ यह शहर दिल्ली के पास खिज्र खाँ ने ही बसाया था और इसी को अपनी राजधानी बनाया था।

👉 रैय्यत-ए-आला-
✍ यह उपाधि खिज्र खाँ ने धारण की थी।

👉 अलाउद्दीन आलम शाह-
✍ यह सैयद वंश का अंतिम शासक है जिसने 1451 ई. में अपनी इच्छा से सुल्तान की गद्दी बहलोल लोदी के समर्थन में छोड़ दी थी।
✍ यह दिल्ली सल्तनत का एकमात्र ऐसा सुल्तान है जिसने अपनी इच्छा से सुल्तान की गद्दी छोड़ी थी।
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खिलजी वंश

May 09, 2018
👉 खिलजी वंश (1290-1320 ई.)-
स्थापना- 1290 ई.
✍अंत- 1320 ई.
✍संस्थापक/प्रथम शासक- जलालुद्दीन खिलजी
✍अंतिम शासक- कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी



1. जलालुद्दीन खिलजी-
✍शासन काल- 1290-1296 ई.
✍उपाधि- शाइस्ता खाँ
जलालुद्दीन खिलजी दिल्ली सल्तनत का सबसे बुजुर्ग शासक था।

👉 क्यूमर्स-
✍यह गुलाम वंश का अंतिम शासक था जिसकी हत्या करके जलालुद्दीन खिलजी ने खिलजी वंश की स्थापना की थी।

👉 कथन-
जलालुद्दीन खिलजी ने यह कथन कहा था "मैं खुद एक मुस्लमान हुँ और मुस्लमान का रक्त बहाना मेरी आदत नहीं है।"

👉रणथम्भौर आक्रमण (सवाई माधोपुर)-
1291 ई. में जलालुद्दीन खिलजी रणथम्भौर दुर्ग पर आक्रमण करता है।
इस समय रणथम्भौर का शासक हम्मीर देव चौहान था।
जलालुद्दीन खिलजी रणथम्भौर दुर्ग के दरवाजे भी नहीं खोल पाता है। इसीलिए अपनी असफलता को यह कहते हुए छुपा लेता है की "ऐसे 100 किलों को तो मैं एक मुस्लमान की दाढ़ी के बाल के बराबर भी नहीं मानता हुँ।"

2. अलाउद्दीन खिलजी-
✍शासन काल- 1296- 1316 ई.
✍वास्तविक नाम- अली गुरुशास्प
✍उपनाम- सिकन्दर सानी/द्वितीय सिकन्दर

👉 जलालुद्दीन खिलजी-
✍ अलाउद्दीन खिलजी ने 1296 ई. में अपने चाचा जलालुद्दीन खिलजी की कड़ामानिकपुर (इलाहाबाद) नामक जगह पर हत्या करके खिलजी वंश का शासक बनता है।

👉 दक्षिण भारत-
✍दक्षिण भारत को जीतने वाला प्रथम सैनापति अलाउद्दीन खिलजी है। जिसने जलालुद्दीन खिलजी के समय दक्षिण भारत पर आक्रमण किया था।

3. शिहाबुद्दीन खिलजी-
✍1316 में बिमारी के कारण अलाउद्दीन खिलजी की मृत्यु हो जाती है जिसके बाद शिहाबुद्दीन खिलजी को खिलजी वंश का अगला शासक बनाया गया था।

4. कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी-
✍शासन काल- 1316-1320 ई.
✍उपनाम- रंगीला बादशाह

👉 खलिफा-
✍कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी दिल्ली सल्तनत का ऐसा प्रथम शासक है जिसने अपना स्वयं का खलिफा घोषित किया था।

👉 रंगीला बादशाह-
कुतुबुद्दीन मुबारक शाह खिलजी दरबार में शराब पिकर तथा स्त्रियों के कपड़े पहन कर आता था इसीलिए इसे रंगीला बादशाह कहा जाता है।
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गुलाम वंश

May 02, 2018
 गुलाम वंश/मामलुक वंश (1206-1290 ई.)-
1. कुतुबुद्दीन ऐबक (1206-1210 ई.)-
👉 संस्थापक-
भारत में गुलाम वंश तथा तुर्क साम्राज्य का संस्थापक कुतुबुद्दीन ऐबक है।
✍कुतुबुद्दीन मोहम्मद गौरी का गुलाम था।

👉 लाखबख्श-
✍अर्थ- लाखो का दान देने वाला।
✍कुतुबुद्दीन ऐबक को लाखबख्श के नाम से जाना जाता था।

👉 कुरान खाँ-
✍कुतुबुद्दीन ऐबक को कुरान खाँ के नाम से भी जाना जाता था।

👉 लाहौर-
✍कुतुबुद्दीन ऐबक ने दिल्ली सल्तनत की पहली राजधानी लाहौर को बनाया था।

👉 कुव्वत-उल-इस्लाम मस्जिद (दिल्ली)-
✍यह भारत की पहली मस्जिद है।
✍इस मस्जिद का निर्माण सन् 1195-98 के बीच कुतुबुद्दीन ऐबक ने करवाया था।

👉 कुतुब मीनार (दिल्ली)-
✍इसका निर्माण कुतुबुद्दीन ऐबक ने अपने गुरु शेख ख्वाजा कुतुबुद्दीन बख्तियार काकी की याद में करवाया था।

👉 अढ़ाई दिन का झोपड़ा (अजमेर)-
यह राजस्थान की प्रथम मस्जिद है।
✍अजमेर में विग्रराज-चतुर्थ/बिसलदेव चौहान के द्वारा एक संस्कृत महाविद्यालय बनवाया गया था।
✍संस्कृत महाविद्यालय को1200 ई. में तुड़वाकर कुतुबुद्दीन ऐबक एक मस्जिद बनवा देता है। जिसे अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहते है।
✍इस मस्जिद में पंजाब शाह फकीर के नाम से अढ़ाई दिन का उर्स लगता है इसीलिए इस मस्जिद को अढ़ाई दिन का झोपड़ा कहते है।

👉 जजिया कर-
✍दिल्ली सल्तनत में जजिया कर लागु करने वाला प्रथम शासक कुतुबुद्दीन ऐबक था।

👉 चौगान/पोलो-
✍सन् 1210 में में चौगान खेलते वक्त घोड़े से गिर जाने के कारण लाहोर में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु हो जाती है।

👉 कुतुबुद्दीन ऐबक का मकबरा-
✍कुतुबुद्दीन ऐबक का मकबरा लाहौर में स्थित है।

2. आरामशाह-
✍सन् 1210 में कुतुबुद्दीन ऐबक की मृत्यु के बाद गुलाम वंश का अगला शासक कुतुबुद्दीन ऐबक के बेटे आरामशाह को बनाया गया था।
✍आरामशाह मात्र 10 माह के लिए ही शासक बना था।

👉 जुद/ जुदू का युद्ध-
समय- 1210 ई.
स्थान- लाहौर
मध्य- अारामशाह तथा इल्तुतमिश
जीत- इल्तुतमिश
हार- आरामशाह
✍इसी युद्ध को जीतने के बाद इल्तुतमिश ने गुलाम वंश की गद्दी प्राप्त की थी।

3. इल्तुतमिश (1211-1236 ई.)-
👉 वास्तविक संस्थापक-
दिल्ली सल्तनत का वास्तविक संस्थापक इल्तुतमिश है। क्योकी इल्तुतमिश ने सर्वप्रथम दिल्ली सल्तनत की राजधानी दिल्ली बनाई थी।

👉 अरबी सिक्के-
टंका- यह चाँदी का सिक्का था।
जीतल- यह तांबे का सिक्का था।
✍दिल्ली सल्तनत में सर्वप्रथम अरबी भाषा के सिक्के/ अरबी सिक्के चलाने वाला प्रथम शासक इल्तुतमिश था।

👉 सुल्तान-
✍दिल्ली सल्तनत में सुल्तान की उपाधि धारण करने वाला प्रथम शासक इल्तुतमिश था।

👉 इक्तादारी प्रणाली/ इक्ता प्रथा-
✍दिल्ली सल्तनत में इक्तादारी प्रथा सर्वप्रथम इल्तुतमिश ने लागू की थी।
✍इस प्रथा में सैनिकों को नगद वेतन के बदले भू-खण्ड दान में दिया जाता था।

👉 तुर्कान-ए-चिहलगानी/ दल-ए-चालीसा-
✍इल्तुतमिश के द्वारा चालीस गुलामों का दल/ संगठन बनाया गया था जिसे दल-ए-चालीसा कहा गया था।
✍यह दल दरबार की सूचना देता था।

👉 गुलामों का गुलाम-
✍गुलामों का गुलाम इल्तुतमिश को कहते है।

👉 तराईन का तृतीय युद्ध-
समय- 1216 ई.
स्थान- हरियाणा
मध्य- इल्तुतमिश तथा याजुद्दीन यलदौज
जीत- इल्तुतमिश
हार- याजुद्दीन यलदौज

👉 खोकर विद्रोह-
✍इसी विद्रोह को दबाने के दौरान 1236 ई. इल्तुतमिश की मृत्यु हो जाती है।

4. रजिया सुल्तान (1236-1240 ई.)-
पिता- इल्तुतमिश
माता- शाहतुर्कान
भाई- रुकुनुद्दीन फिरोजशाह
✍रजिया सुल्तान भारत की प्रथम मुस्लिम महिला शासिका थी।

👉 अल्तुनिया-
✍यह भटिंडा (पंजाब) का सुबेदार था जिससे रजिया सुल्तान विवाह करती है।

👉 कैथल (हिसार, हरियाणा)-
✍1240 ई. में इसी स्थान पर भाई रुकुनुद्दीन फिरोजशाह के द्वारा रजिया सुल्तान की हत्या करवा दी गई थी।

5. बलबन (1266-1287 ई.)-
👉 राजत्व का सिद्धांत-
✍बलबन ने राजा ने राजा के पद्द की प्रतिष्ठा बढ़ाने के लिए राजत्व का सिद्धांत लागू किया था।

👉 लोह एवं रक्त कि निति/ तलवार एवं जहर कि निति-
✍यह निति दरबार में बलबन ने लागू की थी।

👉 उलूग खाँ-
✍यह उपाधि बलबन ने धारण की थी।

👉 जिल्ले-ए-इलाही/जिल्ले इल्लाह-
✍बलबन अपने आप को अल्लाह का प्रतिनिधि मानता था इसीलिए अपने आप को दरबार में जिल्ले-ए-इलाही बुलाता था।

👉 बलबन के द्वारा लागू की गई तीन नयी परम्पराएं-
1. सिजदा/सजदा- दरबार में सरदार के सामने सर झुकाना।
2. पैबोस/पाबोस- दरबार में सरदार के पैर चुमना।
3. नवरोज/नौरोज- नव वर्ष त्योहार।

👉 बलबन के द्वारा बनाये गये विभाग-
✍दीवान-ए-बरीद- यह बलबन का गुप्तचर विभाग था।
✍दीवान-ए-आरीज- यब बलबन का सैन्य विभाग था।

👉 तैमूर खाँ-
✍यह मंगोल आक्रमणकारी था जिसने बलबन के बेटे सुल्तान मोहम्मद को हराया था तथा सुल्तान मोहम्मद की हत्या कर दी थी इसीलिए सुल्तान मोहम्मद को शहीद शहजादा/शहीद बादशाह के नाम से जाना जाता है।

👉 मंगोलपुरी (दिल्ली)-
✍दिल्ली सल्तनत में सर्वाधिक मंगोल अाक्रमण बलबन के काल में हुए थे।
✍बलबन ने मंगोलो को दिल्ली की मंगोलपुरी नामक जगह पर ही बसाया था।

👉 तुर्कान-ए-चिहलगानी-
✍इल्तुतमिश के इस संगठन को बलबन ने ही समाप्त किया था।

👉 चालिसा-
✍बलबन की मृत्यु होने पर उसके दरबारीयों ने 40 दिन तक शोक मनाया था जिसे चालिसा कहते है।

6. क्यूमर्स-
✍यह गुलाम वंश का अंतिम शासक था जिसकी हत्या जलालूद्दीन खिलजी ने की थी।
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दिल्ली सल्तनत

April 29, 2018
👉 दिल्ली-
✍ भारत में दिल्ली की स्थापना 11वीं शताब्दी में तोमर वंश के शासक अनंगपाल ने की थी।
✍ दिल्ली की स्थापना ढिल्लिका के नाम से की गई थी।
👉 दिल्ली के प्राचीन नाम-
✍ हस्तिनापुर
✍ इन्द्रप्रस्थ नगरी

👉 राजधानी-
✍ सन् 1911 में भारत की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित करने की घोषणा की गई।
✍ 1 अप्रेल, 1912 को भारक की राजधानी कलकत्ता से दिल्ली स्थानांतरित कर दि गई।

👉 एडवर्ड लुटियंस-
✍ यह आधुनिक दिल्ली का संस्थापक/वासतुकार है।

👉 दिल्ली सल्तनत के राजवंश (1206-1526 ई.)-

1. गुलाम वंश-
✍ शासन काल- 1206-1290 ई.
✍ संस्थापक/प्रथम शासक- कुतुबुद्दीन ऐबक
✍ अंतिम शासक- क्यूमर्स
✍ गुलाम वंश दिल्ली सल्तनत का प्रथम राजवंश है।
✍ गुलाम वंश कि अधिक जानकारी के लिए 👉 यहां क्लिक करें

2. खिलजी वंश-
✍ शासन काल- 1290-1320 ई.
✍ संस्थापक/प्रथम शासक- जलालुद्दीन खिलजी
✍ अंतिम शासक- मुबारक शाह खिलजी
✍ खिलजी वंश दिल्ली सल्तनत में सबसे कम (30 वर्ष) कार्यकाल वाला वंश है।
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3. तुगलक वंश-
✍ शासन काल- 1320-1414 ई.
✍ संस्थापक/प्रथम शासक- ग्यासुद्दीन तुगलक
✍ अंतिम शासक- नासिरुद्दीन मोहम्मद शाह तुगलक
✍ तुगलक वंश दिल्ली सल्तनत में सबसे अधिक (94 वर्ष) कार्यकाल वाला वंश है।

4. सैयद वंश-
✍ शासन काल- 1414-1451 ई.
✍ संस्थापक/प्रथम शासक- खिज्र खाँ
✍ अंतिम शासक- अलाऊद्दीन आलम शाह
✍ सैयद वंश कि अधिक जानकारी के लिए 👉 यहां क्लिक करें

5. लोदी वंश-
✍ शासन काल- 1451-1526 ई.
✍ संस्थापक/प्रथम शासक- बहलोल लोदी
✍ अंतिम शासक- इब्राहिम लोदी
✍ लोदी वंश दिल्ली सल्तनत का अंतिम वंश है।
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भारत पर विदेशी आक्रमण

April 29, 2018
1. मोहम्मद बिन कासिम/ मीर कासिम-
👉भारत पर आक्रमण करने वाला प्रथम अरबी आक्रमणकारी मीर कासिम था।
 अल हिजाज-
👉यह बगदाद (इराक) का शासक था जिसने मीर कासिम को सिंध पर आक्रमण करने के लिए भेजा था।

 रावर का युद्ध-
👉यह युद्ध 20 जून, 712 ई. को मीर कासिम तथा सिंध के राजा दाहिर के मध्य हुआ था।
👉इस युद्ध में मीर कासिम की जीत होती है।

 भारत का प्रथम जौहर-
👉रावर के युद्ध में राजा दाहिर की पत्नी रानीबाई ने जौहर किया था और यही जौहर को भारत का प्रथम जौहर है।

 भारत में निम्नलिखित वस्तुएं लाने का श्रेय मीर कासिम को दिया जाता है।
👉खजुर लाने का
👉ऊँट लाने का
👉जजिया कर लागु करने का

 दिरहम-
👉भारत में पहली बार शुद्ध अरबी सिक्के/ शुद्ध अरबी भाषा के सिक्के चलाने वाला प्रथम आक्रमणकारी मीर कासिम था।
👉मीर कासिम ने दिरहम नाम के अरबी सिक्के चलाये थे।

 चचनामा-
👉यह पुस्तक इब्न अल अहमद के द्वारा लिखी गई है।
👉इस पुस्तक में मीर कासिम के अाक्रमण का वर्णन मिलता है।

2. महमूद/ मोहम्मद गजनवी- (1001-1027 ई.)
👉भारत पर आक्रमण करने के पिछे महमूद गजनवी का मुख्य उद्देश्य भारत से धन लूटना था।
👉महमूद गजनवी ने 1001 से 1027 ई. के बीच भारत पर कुल 17 बार आक्रमण किया था।
👉भारत पर सर्वाधिक (17 बार) आक्रमण करने वाला विदेशी आक्रमणकारी महमूद गजनवी था।

 सुबुक्तगीन-
👉महमूद गजनवी गजनी (अफगानिस्तान) के शासक सुबुक्तगीन का पुत्र था।

 महमूद गजनवी का प्रथम आक्रमण-
👉महमूद गजनवी ने प्रथम आक्रमण 1001 ई. में पंजाब के शासक जयपाल पर किया था तथा इस आक्रमण में महमूद गजनवी की जीत होती है।

 सोमनाथ/ सोमेश्वर आक्रमण-
👉गजनवी का सबसे प्रसिद्ध आक्रमण 1025 ई. का गुजरात का सोमनाथ/ सोमेश्वर मंदिर आक्रमण माना जाता है।
👉इस आक्रमण में महमूद गजनवी ने चालूक्य वंश के शासक भीम-प्रथम को हराया था।
👉यह आक्रमण महमूद गजनवी का 15वां आक्रमण था।

 बुतशिकन-
👉बुतशिकन का अर्थ- मुर्तियों को तोड़ने वाला
👉सोमनाथ आक्रमण के दौरान महमूद गजनवी ने यह कथन कहा था की 'मैं मुर्ति विक्रेता नहीं बलकी बुतशिकन बनने आया हूँ'

 यामिनी उद् दौला-
👉यह उपाधि महमूद गजनवी ने धारण की थी।

 अलबरुनी-
👉यह अरबी इतिहासकार महमूद गजनवी के साथ भारत आया था।
👉अलबरुनी ने महमूद गजनवी के आक्रमणें के उपर 'किताब-उल-हिंद'/ 'तहकीक-ए-हिंद' पुस्तक लिखी थी।

 महमूद गजनवी की मृत्यु-
👉महमूद गजनवी की मृत्यु 1027 ई. में पंजाब के जाट विद्रोह दबाने के दौनार हुई थी।

3. मोहम्मद गौरी-
★ गौर-
👉मोहम्मद गौरी अफगानिस्तान के गौर क्षेत्र का था।

★ वास्तविक नाम-
👉मोहम्मद गौरी का वास्तविक नाम शिहाबुद्दीन मोहम्मद गौरी

★ उद्देश्य-
👉मोहम्मद गौरी का भारत पर आक्रमण करने का मुख्य उद्देश्य भारत में मुस्लिम साम्राज्य की स्थापना करना था।

★ मुल्तान (पाकिस्तान) आक्रमण-
👉मोहम्मद गौरी ने अपना पहला आक्रमण 1175 ई. में मुल्तान की कारामती जाती/ समुदाय पर किया था तथा जीत हासिल की थी।

★ पाटन (गुजरात) आक्रमण-
👉मोहम्मद गौरी दुसरा आक्रमण पाटन के शासक मुलराज द्वितीय के उपर 1178 ई. में किया गया था। जिसमें मोहम्मद गौरी की हार होती है।

★ तराईन का प्रथम युद्ध-
👉समय- 1191 ई.
👉स्थान- हरियाणा
👉मध्य- मोहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान
👉जीत- पृथ्वीराज चौहान
👉हार- मोहम्मद गौरी

★ तराईन का द्वितीय युद्ध-
👉समय- 1192 ई.
👉स्थान- हरियाणा
👉मध्य- मोहम्मद गौरी तथा पृथ्वीराज चौहान
👉जीत- मोहम्मद गौरी

👉हार- पृथ्वीराज चौहान

★ जयचंद-
👉यह कन्नौज का शासक था।
👉मोहम्मद गौरी का पृथ्वीराज चौहान पर आक्रमण करने का मुख्य उद्देश्य जयचंद द्वारा मोहम्मद गौरी को उकसाना था।
👉जयचंद को इतिहास में देशद्रोह कहा जाता है।

★ चन्दावर का युद्ध-
👉समय- 1194 ई.
👉मध्य- मोहम्मद गौरी तथा जयचंद
👉जीत- मोहम्मद गौरी
👉हार- जयचंद (मारा गया)

★ इख्तियारुद्दीन बख्तियार खिलजी-
👉यह मोहम्मद गौरी का सैनापति था।
👉इसी ने बंगाल आक्रमण के दौरान बिहार के नालंदा विश्वविद्यालय को तोड़ दिया था।

★ मोहम्मद गौरी की मृत्यु-
👉1206 ई. में पंजाब के खोखर विद्रोह के दौरान झेलम नदी के पास मोहम्मद गौरी की मृत्यु हो जाती है।
भारत पर विदेशी आक्रमण भारत पर विदेशी आक्रमण Reviewed by asdfasdf on April 29, 2018 Rating: 5
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