Results for राजस्थान की कला एवं संस्कृति

मूर्तिकला एवं चित्रकला

November 05, 2018

۞ गुप्तकालीन मूर्तियों में अधिकतर मूर्तियां देवी, देवता, बु) और तीर्थंकर की हैं गुप्तकालीन धातु मूर्तिकला में नालन्दा तथा सुल्तानगंज की बु) की मूर्ति उल्लेखनीय है। गुप्तकाल की मूर्तियों में कुषाणकालीन नग्नता एवं कामुकता का पूर्णतः लोप हो गया था। ۞ गुप्तकाल में चित्रकला के क्षेत्रा में अभूतपूर्व प्रगति हुई। इस काल की चित्रकला के अवशेष अजन्ता तथा बाघ गुफाओं से प्राप्त होते हैं। ۞ अजन्ता गुफा की चित्रकारी को सर्वप्रथम 1919 में सर जेम्स अलेक्जेण्डर ने देखा। अजन्ता की गुफायें बौ) धर्म के महायान शाखा से संबंधित है। कुल 29 गुफाओं में वर्तमान में केवल 6 ही शेष है जिसमें गुफा संख्या 16 तथा 17 को गुप्तकालीन माना जाता है। गुफा संख्या 16 में श्मरणासन्न राजकुमारीश् का चित्र प्रशंसनीय है। गुफा संख्या 17 के चित्र जिसे श्चित्राशालाश् कहा गया है। इसमें बु) के जन्म, जीवन, महाभिनिष्क्रमण एवं महापरिनिर्वाण की घटनाओं से सम्बन्धित चित्र उकेरे गये हैं। ۞ बाघ की गुफायें ग्वालियर के समीप विंध्यपर्वत को काट कर बनाई गयी थी। 1818 ई. में डैजरफील्ड ने इन गुफाओं को खोजा, जहां से 9 गुफायें मिली है। बाघ गुफा के चित्र आम जन-जीवन से संबंधित है।
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राजस्थान की प्रमुख हवेलियां

September 17, 2018
राजस्थान की प्रमुख हवेलियां - महत्वपूर्ण तथ्य
👉जैसलमेर-
➯राजस्थान में जैसलमेर को हवेलियों का नगर कहते है।
➯पत्थरों की कटाई एवं जालियों लिए प्रसिद्ध हवेलियां जैसलमेर की है।
➯जैसलमेर में पटवों की हवेलियों को सतखंडा हवेली कहा जाता है।
➯जैसलमेर में स्थित सालिम सिंह की हवेली को नौ खंड हवेली कहते है।
➯सालिम सिंह की हवेली की दो ऊपरी मंजिले लकड़ी से बनी हुई थी इन दो मंजिलों को जहाज महल कहा जाता था।
➯जैसलमेर में स्थित दीवान नथमल की हवेली दो सगे भाईयों हाथी तथा लालू को द्वारा बनवाई गई थी।

👉बीकानेर-
➯लाल पत्थरों से निर्मित हवेलियां बीकानेर में स्थित है।
➯बीकानेर स्थित रामपुरिया की हवेली में हिंदू मुस्लिम यूरोपीय कला का मिश्रण है।

👉जोधपुर-
➯जोधपुर की हवेलियों में स्थापत्य कला की बारीकियों का प्रयोग हुआ है।

👉शेखावाटी-
➯शेखावाटी की हवेलियां चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯शेखावाटी को ओपन आर्ट गैलरी कहा जाता है।
➯नवलगढ़ को शेखावाटी की स्वर्ण नगरी कहा जाता है।
➯नवलगढ़ की हवेलीयां सोने की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯महनसर (झुन्झुनू) की हवेली सोने चांदी की चित्रकारी के लिए प्रसिद्ध है।
➯कृष्ण लीला के भित्ती चित्रों के लिए सहजाराम पोद्दार की हवेली प्रसिद्ध है।

👉पोल या दयोड़ी-
➯हवेलियों के मुख्य द्वार को पोल या दयोड़ी कहते है।

👉गवाक्ष-
➯हवेलियों के मुख्य द्वार के दोनों ओर स्थित चबूतरों को गवाक्ष कहते है।

👉राजस्थान की प्रमुख हवेलियां-
जैसलमेर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पटवों की हवेलीजैसलमेर
2सालिम सिंह की हवेलीजैसलमेर
3दीवान नथमल की हवेलीजैसलमेर
बीकानेर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1डागा की हवेलीबीकानेर
2कोठारी की हवेलीबीकानेर
3रामपुरिया की हवेलीबीकानेर
4बच्छावतों की हवेलीबीकानेर
5मोहता की हवेलीबीकानेर
जोधपुर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पुष्य हवेलीजोधपुर
2पच्चिसां हवेलीजोधपुर
3पाल हवेलीजोधपुर
4बड़े मियां की हवेलीजोधपुर
5पोकरण की हवेलीजोधपुर
6राखी हवेलीजोधपुर
7लालचन्द ढड्डा की हवेली(फलौदी) जोधपुर
झुन्झुनू की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पोद्दार की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
2बघेरियां या भगेरिया की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
3भगतों की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
4ईसरदास मोदी की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
5लालधर जी धरकाजी की हवेलीनवलगढ़ (झुन्झुनू)
6रामदेव चौखाणी की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
7सागरमल लाड़िया की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
8रामनाथ गोयनका की हवेलीमण्डावा (झुन्झुनू)
9सेठ जयदयाल केडिया की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
10नाथूराम पोद्दार की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
11सीताराम सिगतिया की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
12सेठ हीराराम बनारसी लाल की हवेलीबिसाऊ (झुन्झुनू)
13सोने चांदी की हवेलीमहनसर (झुन्झुनू)
14बीरला हवेलीपिलानी (झुन्झुनू)
15मेहनसर की हवेलीझुन्झुनू
16टीबड़ेवाला की हवेलीझुन्झुनू
सीकर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पंसारी की हवेलीश्रीमाधोपुर (सीकर)
2केडिया एवं राठी की हवेलीलक्ष्मणगढ़ (सीकर)
3सहजा राम पोद्दार की हवेलीफतेहपुर (सीकर)
4बिनाणियों की हवेलीसीकर
5बैजनाथ रुइया की हवेलीरामगढ़ (सीकर)
6खेमका तथा गोयनका सेठों की हवेलियांरामगढ़ (सीकर)
चूरू की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1सुराणों के हवामहल या सुराणों की हवेलीचूरू
2रामविलास गोयनका की हवेलीचूरू
3मालजी का कमराचूरू
4मंत्रियों की मोटी हवेलीचूरू
जयपुर की हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1पुरोहीतजी की हवेलीजयपुर
2चूरसिंह की हवेलीजयपुर
3रत्नाकर भट्ट पुण्डरीक की हवेलीजयपुर
अन्य प्रमुख हवेलियां
#हवेली का नामस्थान
1मोहनसिंह जी की हवेलीउदयपुर
2बागोर की हवेलीउदयपुर
3सुनहरी कोठी हवेलीटोंक
4बड़े देवता की हवेलीकोटा
5झाली की हवेलीकोटा
6सोनी जी की सलियांअजमेर
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राजस्थान के प्रमुख त्योहार

August 29, 2018
राजस्थान के त्योहार
👉हिंदी महीने क्रमशः-
क्र.संहिंदी महीनेमहीने (ग्रेगोरियन)
1चैत्रमार्च-अप्रैल
2वैषाखअप्रैल-मई
3ज्येष्ठमई-जून
4आषाढ़जून-जुलाई
5श्रावणजुलाई-अगस्त
6भाद्रपदअगस्त-सितम्बर
7अाश्विनसितम्बर-अक्टूबर
8कार्तिकअक्टूबर-नवम्बर
9मार्गशीर्षनवम्बर-दिसम्बर
10पौषदिसम्बर-जनवरी
11माघजनवरी-फरवरी
12फाल्गुनफरवरी-मार्च

👉राष्ट्रीय पंचांग-
➯राष्ट्रीय पंचांग का पहला महीना चैत्र होता है।
➯राष्ट्रीय पंचांग का अंतिम महीना फाल्गुन होता है।
➯राष्ट्रीय पंचांग का पहला दिन चैत्र कृष्ण एकम होता है।
➯राष्ट्रीय पंचांग का अंतिम महीना फाल्गुन पूर्णिमा होता है।
➯भारत का राष्ट्रीय पंचांग शक संवत पर आधारित है।
➯भारतीय संविधान में शक संवत को राष्ट्रीय पंचांग के रूप में 22 मार्च 1957 को स्वीकार किया गया था।
➯शक संवत का प्रारम्भ 78 ई. में कनिष्क के काल से हुआ था।
➯शक संवत के अनुसार वर्तमान में वर्ष 1940 (2018-78) चल रहा है।
चैत्र महीने के त्योहार
1. चैत्र कृष्ण एकम/प्रतिपदा- धुलण्डी
2. चैत्र कृष्ण अष्टमी- शीतलाष्टमी
3. चैत्र शुक्ल एकम/प्रतिपदा- घुडला (गुड़ी पड़वा त्योहार), हिन्दु नववर्ष, नवरात्रा प्रारम्भ
4. चैत्र शुक्ल द्वितीया- सिंजारा/ सिधारा
5. चैत्र शुक्ल तृतीया- गणगौर
6. चैत्र शुक्ल पंचमी- गुलाबी गणगौर
7. चैत्र शुक्ल अष्टमी- दुर्गाष्टमी/ नवरात्रा समाप्त, अशोकाष्टमी
8. चैत्र शुक्ल नवमी- रामनवमी
9. चैत्र शुक्ल त्रयोदशी- महावीर जयंती
10. चैत्र शुक्ल पूर्णिमा- हनुमान जयंती

👉शीतलाष्टमी-
➯जयपुर की चाकसू नामक जगह पर शीतला माता का मेला भरता है।

👉घडला त्योहार-
➯घडला त्योहार राजस्थान में मारवाड़ में मनाया जाता है।

👉अशोकाष्टमी-
➯अशोकाष्टमी के दिन अशोक वृक्ष की पूजा की जाती है।

👉गणगौर-
➯राजस्थान में सर्वाधिक गीतों वाला त्योहार गणगौर को माना जाता है।
➯होली के 15 दिन बाद ही गणगौर का त्योहार मनाया जाता है।
➯राजस्थान में गणगौर जयपुर जिले की प्रसिद्ध है।
➯गणगौर त्योहार से त्योहारों का समापन होता है।
➯राजस्थान के जैसलमेर जिले में गणगौर के दिन गवर की पूजा की जाती है। (ईशर की पूजा नहीं की जाती इस दिन)

👉गुलाबी गणगौर-
➯राजस्थान में गुलाबी गणगौर का त्योहार राजसमंद जिले की नाथद्वारा नामक जगह का प्रसिद्ध है।

👉रामनवमी-
➯रामनवमी के दिन भगवान श्री राम का जन्म हुआ था।
वैशाख महीने के त्योहार
1. वैशाख शुक्ल तृतीया- अक्षय तृतीया/आखातीज, परशुराम जयंती

👉आखातीज-
➯आखातीज के दिन सर्वाधिक बाल विवाह होते है क्योकि आखातीज के दिन अभूज/अबूझ सावा माना जाता है।
➯आखातीज के दिन भगवान परशुराम का जन्म हुआ था।
➯आखातीज के दिन सतयुग व त्रेतायुग का प्रारम्भ हुआ था।
ज्येष्ठ महीने के त्योहार
1. ज्येष्ठ शुक्ल एकादशी- निर्जला एकादशी (ग्यारस)
2. ज्येष्ठ शुक्ल पूर्णिमा- पीपल पूर्णिमा

👉निर्जला एकदशी-
➯निर्जला एकादशी के दिन महिलाएं बिना जल ग्रहण किये निर्जला एकादशी का व्रत रखती है।
आषाढ महीने के त्योहार
1. आषाढ कृष्ण एकादशी- योगिनी एकादशी
2. आषाढ शुक्ल एकादशी- देवशयनी एकादशी
3. आषाढ शुक्ल पूर्णिमा- गुरु पूर्णिमा
श्रावण महीने के त्योहार
1. श्रावण कृष्ण पंचमी- नागपंचमी
2. श्रावण कृष्ण षष्ठी- उब छठ
3. श्रावण कृष्ण नवमी- निडरी नवमी
4. श्रावण शुक्ल तृतीया- छोटी तीज, श्रावणी तीज
5. श्रावण शुक्ल पूर्णिमा- रक्षा बन्धन (नारियल पूर्णिमा/ सत्य पूर्णिमा/ श्रावणीक पूर्णिमा)

👉नागपंचमी-
➯नागपंचमी के दिन सापों की पूजा की जाती है।

👉निडरी नवमी-
➯निडरी नवमी के दिन नेवलों की पूजा की जाती है।

👉तीज-
➯छोटी तीज से ही त्योहारों का आगमन होता है।
➯राजस्थान में तीज माता का मेला जयपुर जिले का प्रसिद्ध है।

👉रक्षा बन्धन-
➯रक्षा बन्धन के दिन श्रवण कुमार की पूजा की जाती है।
भाद्रपद महीने के त्योहार
1. भाद्रपद कृष्ण तृतीया- बड़ी तीज/ सातुड़ी तीज/ कजली तीज
2. भाद्रपद कृष्ण षष्ठी- हल छठ
3. भाद्रपद कृष्ण अष्टमी- कृष्ण जन्माषष्टमी
4. भाद्रपद कृष्ण नवमी- गोगा नवमी
5. भाद्रपद कष्ण द्वादशी- बच्छ बारस
6. भाद्रपद शुक्ल तृतीया- हरतालिका तीज
7. भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी- गणेश चतुर्थी/ चतरा चौथ
8. भाद्रपद शुक्ल पंचमी- ऋषि पंचमी
9. भाद्रपद शुक्ल एकादशी- देवझुलणी एकादशी/ जलझुलणी एकादशी

👉कजली तीज-
➯कजली तीज के दिन नीम के वृक्ष की पूजा की जाती है।
➯राजस्थान में कजली तीज का मेला बूंदी में भरता है।
➯राजस्थान में कजली तीज की सवारी बूंदी जिले की प्रसिद्ध है।

👉बच्छ बारस-
➯बच्छ बारस के दिन गाय व बछड़े की पूजा की जाती है।
आश्विन महीने के त्योहार
1. आश्विन शुक्ल दशमी- दशहरा/ विजयादशमी

👉दशहरा-
➯दशहरे के दिन खेजड़ी वृक्ष की पूजा की जाती है।
➯दशहरे का मेला राजस्थान में कोटा जिले का प्रसिद्ध है।
कार्तिक महीने के त्योहार
1. कार्तिक कृष्ण चतुर्थी- करवाचौथ
2. कार्तिक कृष्ण अमावस्या- दीपावली
3. कार्तिक शुक्ल द्वितीया- भैयादूज
4. कार्तिक शुक्ल नवमी- आंवला नवमी
5. कार्तिक शुक्ल एकादशी- देव उठनी ग्यारस

👉दीपावली-
➯दीपावली के दिन गणेश व लक्ष्मी की पूजा की जाती है।

👉आंवला नवमी-
➯आंवला नवमी के दिन आंवले के वृक्ष की पूजा की जाती है।
माघ महीने के त्योहार
1. माघ कृष्ण चतुर्थी- संकट चौथ/ तिलकुटा चौथ (तिल चौथ)
2. माघ कृष्ण अमावस्या- मौनी अमावस्या
3. माघ शुक्ल पंचमी- बसंत पंचमी
फाल्गुन महीने के त्योहार
1. फाल्गुन शुक्ल पूर्णिमा- होली

👉होली-
➯राजस्थान में पत्थर मार होली बाड़मेर जिले की प्रसिद्ध है।
➯राजस्थान में लठमार होली श्री महावीर जी (करौली) की प्रसिद्ध है।
➯राजस्थान में कोड़ामार होली भिनाय (अजमेर) की प्रसिद्ध है।
➯राजस्थान में देवर भाभी की होली ब्यावर (अजमेर) की प्रसिद्ध है।
➯राजस्थान में अंगारों की होली केकड़ी (अजमेर) की प्रसिद्ध है।
➯राजस्थान में गोबर के कंडों की होली गलियाकोट (डूंगरपुर) की प्रसिद्ध है।
मुस्लिम धर्म के त्योहार
1. मुहर्रम-
➯मुहर्रम का त्योहार कुर्बानी का त्योहार है।
➯मुहर्रम मुहम्मद शहब के बेटे इमाम हुसैन के शहीदी दिन को शोक दिवस के रूप में मनाया जाता है।
➯मुहर्रम के दिन ताशा नामक वाद्य यंत्र के साथ ताजिये निकाले जाते है।

2. ईद उल मिला दुलनबी-
➯इद उल मिला दुलनबी त्योहार को बारावफाता भी कहते है।
➯मुस्लिम धर्म के प्रवर्तक हजरत मुहम्मद साहब के जन्म दिवस के दिन ईद उल मिला दुलनबी त्योहार मनाया जाता है।

3. ईद उल फितर-
➯इद उल फितर त्योहार को मिठी ईद भी कहते है।

4. ईद उल जूहा-
➯ईद उल जूहा त्योहार को बकरी ईद भी कहते है।
➯बकरी ईद के दिन बकरे या बकरी की बली दी जाती है।
सिख धर्म के त्योहार
1. वैषाखी-
➯वैषाखी का त्योहार प्रतिवर्ष 13 अप्रैल को मनाया जाता है।

2. लोहड़ी-
➯लोहड़ी का त्योहार प्रतिवर्ष 13 जनवरी को मनाया जाता है।

3. गुरु नानक जयंती-
➯गुरु नानक जयंती कार्तिक पूर्णिमा को मनायी जाती है।

4. गुरु गोविंद सिंह जयंती-
➯गुरु गोविंद सिंह जयंती पौष शुक्ल सप्तमी को मनायी जाती है।
जैन धर्म के त्योहार
1. दस लक्षण त्योहार-
➯दस लक्षण त्योहार चैत्र, भाद्रपद व माघ महीने की शुक्ल पंचमी से लेकर पूर्णिमा तक मनाया जाता है।

2. पर्यूषण त्योहार-
➯पर्यूषण त्योहार जैनियों के द्वारा 10 दिन तक मनाया जाता है।

3. रोट तीज-
➯रोट तीज का त्योहार भाद्रपद शुक्ल तृतीया को मनाया जाता है।

4. महावीर जयंती-
➯महावीर जयंती चैत्र शुक्ल त्रयोदशी को मनायी जाती है।

5. ऋषभ देव जयंती-
➯ऋषभ देव जयंती चैत्र कृष्ण नवमी को मनायी जाती है।

6. चालीहा महोत्सव-
ईसाई धर्म के त्योहार
1. क्रिसमिस डे-
➯क्रिसमिस डे ईसा मसीह के जन्म दिन के दिन 25 दिसम्बर को मनाया जाता है।

2. गुड फ्राइडे-
➯गुड फ्राइडे के दिन ईसा मसीह को सूली पर चढ़ाया गया था।
➯गुड फ्राइडे अप्रैल महीने में मनाया जाता है।

3. ईस्टर-
➯गुड फ्राइडे के अगले रविवार के दिन ईसामसीह के पुनर्जन्म के रूप में मनाया जाता है जिसे ईस्टर कहते है।
सिंधि समाज के त्योहार
1. थुदड़ी या बड़ी सातम-
➯थुदड़ी या बड़ी सातम का त्योहार भाद्रपद कृष्ण सप्तमी के दिन मनाया जाता है।

2. चेटीचंड-
➯चेटीचंड का त्योहार चैत्र शुक्ल एकम के दिन मनाया जाता है।

3. असूचंड पर्व-
➯असूचंड पर्व को फाल्गुन शुक्ल चतुर्थदशी के दिन मनाया जाता है।
अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
👉विक्रम संवत-
➯विक्रम संवत का प्रारम्भ 57 ई.पू. विक्रमाद्वितीय के काल में हुआ था।
➯विक्रम संवत के अनुसार वर्तमान में वर्ष 2075 (2018+57) चल रहा है।

👉हिजरी संवत या पंचांग-
➯हिजरी सन् का पहला महीना मुहर्रम होता है।
➯हिजरी सन् का अंतिम महीना जिलहिज्ज होता है।



➯हिजरी संवत के महीने क्रमशः-
क्र.संइस्लामिक महीने
1मुहर्रम
2सफर
3रबीउल अव्वल
4रबीउल अाखिर
5जमादी-उल-अव्वल
6जमादी-उल-आखिर
7रजब
8शाबान
9रमजान
10शव्वाल
11जिलकाद
12जिलहिज्ज
👉घींगा गणगौर-
➯घींगा गणगौर राजस्थान में उदयपुर जिले की प्रसिद्ध है।

👉फूलडोल उत्सव-
➯राजस्थान में फूलडोल उत्सव रामस्नेही पंथ द्वारा मनाया जाता है।
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राजस्थान के प्रमुख त्योहार राजस्थान के प्रमुख त्योहार Reviewed by asdfasdf on August 29, 2018 Rating: 5

राजस्थान के प्रमुख लोकगीत

August 10, 2018
राजस्थान के लोकगीत 
1. सिठणे/ सिठणें गीत-
➯सिठणे राजस्थान का एकमात्र गाली गीत है।
➯सिठणें गीत को महिलाएं विवाह के अवसर पर हंसी मजाक के उद्देश्य से गाती है।
➯सिठणें गीत में महिलाएं समधी और उसके अन्य संबंधियों को संबोधित करते हुए गाती है।

2. औल्यू गीत-
➯औल्यू का अर्थ 'याद आना' है।
➯औल्यू एक याद गीत है।
➯ओल्यू गीत लड़की की विदाई के समय गाया जाने वाला गीत है।

3. बधावा गीत-
➯बधावा याद गीत है।
➯बधावा गीत भी लड़की की विदाई के समय गाया जाने वाला गीत है।

4. पावणा गीत-
➯पावणा गीत ससुराल में दामाद के आगमन पर गाया जाने वाला गीत है।

5. कामण गीत-
➯कामण का अर्थ जादू टोना है।
➯कामण गीत वर को जादू टोना से बचाने हेतु गाया जाने वाला गीत है।

6. चिरमी गीत-
➯चिरमी गीत ससुराल में वधु अपने भाई या पिता की आने की प्रतिक्षा में गाया जाने वाला गीत है।

7. दुप्पटा गीत-
➯विवाह के अवसर पर दुल्हे की सालियों के द्वारा गाया जाने वाला गीत है।

8. मोरिया गीत-
➯मोरिया विरह गीत है।
➯लड़की की सगाई तो कर दी जाती है लेकिन विवाह में देरी हो जाती है उस समय लड़की द्वारा अपने होने वाले पति की याद में गाया जाने वाला गीत है।

9. पपीहा/पपैया गीत-
➯पपीहा विरह गीत है।
➯प्रेमिका अपने प्रेमी को उपवन (बगीचा) में आकर मिलने के आग्रह में गाया जाने वाला गीत है।

10. कुरजां गीत-
➯कुरजां विरह गीत है।
➯पत्नी अपने प्रदेश गये हुए पति की याद में गाया जाने वाला गीत है।

11. कागा गीत-
➯कागा विरह गीत है।
➯पत्नी अपने प्रदेश गये हुए पति की याद में गाया जाने वाल गीत है।

12. बीछूड़ो/बिच्छुड़ो गीत-
➯बिच्छुड़ा गीत हाड़ौती क्षेत्र में प्रसिद्ध लोकगीत है।
➯वधु को जब बिच्छु काट लेता है और वह मरने वाली है तो उस समय अपने पति को दूसरा विवाह करने के आग्रह में गाया जाने वाला गीत है।

13. सूवटिया गीत-
➯सूवटिया विरह गीत है।
➯भील स्त्रियों के द्वारा अपने प्रदेश गये हुए पति की याद में गाया जाने वाला गीत है।

14. हमसीढो गीत-
➯हमसीढो गीत भील स्त्री तथा पुरुष का दोनों द्वारा सम्मिलित रूप से गाया जाने वाला युग्ल गीत है।

15. काजलियो गीत-
➯काजलियो गीत एक शृंगारिक गीत है।
➯निकासी के समय भावज या भाभी के द्वारा वर की आँखों में काजल डालते समय गाया जाने वाल गीत है।

16. घोड़ी गीत-
➯निकासी के समय वर घोड़ी पर चढ़ते समय गाया जाने वाला गीत है।

17. बीरा गीत-
➯भात लेते समय गाया जाने वाला गीत है।

18. हरजस गीत-
➯हरजस भक्ति गीत है।
➯हरजस गीत भगवान श्री राम व श्रीकृष्ण की भक्ति में गाया जाता है।

19. लांगुरिया गीत-
➯लांगुरिया भक्ति गीत  है।
➯लांगुरिया गीत राजस्थान में करौली का प्रसिद्ध है।
➯लांगुरिया गीत करौली जिल की कैला देवी की अराधना में गाया जाने वाले भक्ति गीत लांगुरिया कहलाते है।

20. इण्डोली/ इडुणी गीत-
➯पणिहारी के द्वारा पानी भरते समय गाया जाने वाला गीत है।
➯इडुणी गीत में इडुली के को जाने का जिक्र किया जाता है।

21. पणिहारी गीत-
➯पणिहारी गीत में पत्नी को पतिव्रता धर्म पर अटल बताया गया है।

22. गोरबंध गीत-
➯गोरबंध शृंगारिक गीत है।
➯गोरबंध गीत में ऊंट के शृंगार का वर्णन किया जाता है।
➯गोरबंध ऊंट के शृंगारिक आभूषण भी है।
➯गोरबंध का प्रश्न आने पर उत्तर में शृंगारिक गीत व ऊंट का शृंगारिक आभूषण दोनों आने की स्थित में प्राथमिकता ऊंट के शृंगारिक आभूषण को ही मान्य है।

23. कुकड़ी गीत-
➯कुकड़ी रातिजगा का अंतिम गीत होता है।

24. मुमल गीत-
➯मुमल शृंगारिक गीत है।
➯मुमल गीत राजस्थान में जैसलमेर जिले का प्रसिद्ध है।

25. ढोला मारू गीत-
➯ढोला व मारू (मरवण) की प्रेम कथाओं पर आधारित गीत है।
➯ढोला मारू गीत राजस्थान में सिरोही जिले का प्रसिद्ध है।

26. झोरावा गीत-
➯झोरावा विरह गीत है।
➯झोरावा गीत राजस्थान में जैसलमेर जिले का प्रसिद्ध है।

27. केसरिया बालम गीत-
➯पत्नी अपने प्रदेश गये हुए पति की याद में गाया जाने वाला गीत है।
➯केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश गीत राजस्थानी रजवाड़ी गीत है।
➯केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश गीत को पहली बार मांगीबाई को द्वारा गाया गया था।
➯केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश गीत को सर्वाधिक बार अल्लाह जिलाह बाई के द्वारा गाया गया था।
➯अल्लाह जिलाह बाई ने केसरिया बालम आवो नी पधारो म्हारे देश को मांड राग में गाया था

28. जलोजला गीत-
➯वधु पक्ष की स्त्रियों के द्वारा वर की बारात का डेरा देखने जाने के प्रसंग में गाया जाने वाला गीत है।

➯अन्य लोकगीत-
1. लालर गीत
2. पटेल्या गीत



अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
➯राजस्थान की प्रमुख मांड गायिकाएँ-
1. गवरी देवी- बीकानेर
2. गवरी बाई- पाली
3. बन्नो बेगम- जयपुर
4. अल्लाह जिलाह बाई- बीकानेर
5. श्रीमती जमीला बानो- जोधपुर

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राजस्थान के प्रमुख लोकगीत राजस्थान के प्रमुख लोकगीत Reviewed by asdfasdf on August 10, 2018 Rating: 5

राजस्थान के प्रमुख आभूषण

August 08, 2018
राजस्थान के आभूषण 
👉सिर व माथे के आभूषण-
1. बोरला
2. रखड़ी
3. टिकड़ा
4. ताविद
5. मेमंद
6. फीणी
7. साकणी/ सांकली
8. टिडी भलको
9. शिशफूल
10. सुरमांग
11. मांग टिका

👉नाक के आभूषण-
1. नथ (भवर कड़ी)
2. लौंग
3. कांटा
4. चोंप
5. चुन्नी
6. बेसरी
7. फिणी
8. बुलाक

👉दांत के आभूषण-
1. रखन
2. चूप

👉कान के आभूषण-
1. कर्णफूल
2. सुरलिया
3. मोरफवर
4. झेला
5. झमेला
6. झुमका
7. लटकन
8. कुठल/कुण्डल
9. मुर्की
10. अगोटया
11. टाॅप्स
12. बाली
13. पिपली पत्र
14. गुरड़े

👉गले के आभूषण-
1. मटरवाला
2. मोहनमाला
3. तिमणिया
4. थमणिया
5. पंचलड़ी
6. चम्पाकली
7. गलपटिया
8. गलसरी
9. मांदलिया
10. मंगलसूत्र
11. तुलसी
12. रानी हार/ राणीहार
13. चन्दन हार
14. मोती हार
15. कंठी
16. हमेल
17. टेवटा

👉बाजू के आभूषण-
1. बाजूबंद
2. भुजबंद
3. अणत
4. तकमा
5. टड्डा

👉कलाई/हाथ के आभूषण-
1. चुड़ा
2. कड़ा
3. कंगन
4. बंगड़ी
5. गोखरु
6. गजरा
7. हथफूल
8. हथपान
9. हारपान
10. पाटला

👉हाथ की अंगुली के आभूषण-
1. अंगुठी
2. मुंदड़ी
3. छल्ला
4. बींठी/बीटी

👉हाथ के अंगूठे का आभूषण-
1. अरसी

👉कमर के आभूषण-
1. तागड़ी/ तगड़ी
2. करधनी/करथनी
3. कणकती
4. कंदोर/ कन्दोरा
5. सटका

👉पैर के आभूषण-
1. पाजेब/पायजेब
2. पायल
3. पेंजनिया
4. नेवरी/नवरी
5. नूपुर
6. झांझर/ झांझरिया
7. छेलकड़ी/ छलकड़ा
8. हिरणामैन

👉पैर की अंगुली के आभूषण-
1. मछी
2. बिछिया
3. पगपान
4. फोलरी



अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
👉ऊँट की सजावट की वस्तुएं-
1. तंग
2. मोरखा
3. गोरबन्द
4. पिलाण

👉गुरड़े-
➯गुरड़े ग्रामीण पुरुषों के कान का आभूषण है।

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राजस्थान के प्रमुख आभूषण राजस्थान के प्रमुख आभूषण Reviewed by asdfasdf on August 08, 2018 Rating: 5

राजस्थान की वेशभूषा

August 08, 2018
 औरतों के पहनावे (राजस्थानी वेशभूषा)
👉आदिवासी महिलाओं (विवाहित महिला) की ओढ़नी-
1. तारा भांत की ओढ़नी
2. केरी भांत की ओढ़नी
3. लहर भांत की ओढ़नी
4. ज्वार भांत की ओढ़नी

👉कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी-
➯आदिवासी अविवाहित महिला (कुंवारी कन्या) के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को कटकी/ पावली भांत की ओढ़नी कहते है।

👉जाम साई-
➯आदिवासी महिलाओं की साड़ी को जाम साई कहते है।

👉नादंणा-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे को नादणा कहते है।
➯नादणा घाघरा राजस्थान में भिलवाड़ा का प्रसिद्ध है।

👉रेनसाई-
➯आदिवासी महिलाओं के घाघरे की छिट को रेनसाई कहते है।

👉सिंदरी-
➯भील स्त्रियों के लाल रंग की साड़ी को सिंदरी कहते है।

👉पिरिया-
➯भील स्त्रियों के द्वारा पहने जाने वाले पीले रंग के लहंगे को पिरिया कहते है।

👉तिलका-
➯तिलका मुस्लिम महिलाओं का पहनावा है।

👉कछाबू-
➯भील स्त्रियों के द्वारा घुटने तक पहने जाने वाले लहंगे को कछाबू कहते है।

👉कवर जोड़-
➯मामा के द्वारा वधु के लिये लाई गई ओढ़नी को कवर जोड़ कहते है।

👉बाला चुनड़ी-
➯मामा के द्वारा वधु की माँ के लिये लाई गई चुनड़ी/ ओढ़नी को बाला चुनड़ी कहते है।

👉पोमचा-
➯पोमचे का रंग पीला होता है।
➯पोमचा राजस्थान में जयपुर जिले का प्रसिद्ध माना जाता है।
➯जच्चा स्त्रियों के द्वारा ओढ़े जाने वाली ओढ़नी को पोमचा कहते है।

👉चीड़/चीढ़ का पोमचा-

➯विधवा महिलाओं के द्वारा ओढ़े जाने वाली काले रंग की ओढ़नी को चीड़ का पोमचा कहते है।

पुरुषों के पहनावे (राजस्थानी वेशभूषा)
👉अंगरखी/ बुगतरी-
➯पुरुषों के शरीर के उपरी भाग में पहने जाने वाले वस्त्र को अंगरखी/ बुगतरी कहते है।

👉ठेपाड़ा/ढेपाड़ा-
➯भील पुरुषों के द्वारा पहनी जाने वाली तंग धोती को ढ़ेपाक कहते है।

👉पोत्या-
➯भील पुरुषों के साफे को पोत्या कहते है।

👉खोयतू/खयोतू-
➯भील पुरुषों के द्वारा बांधे जाने वाली लंगोटी को खोयतू/ खयोतू कहते है।

अन्य महत्वपूर्ण तथ्य
👉आतम सुख-
➯तेज सर्दी से बचने के लिये ओढ़े जाने वाले वस्त्र को अात्मसुख कहते है।

👉खपट्टा-
➯शहरीया जनजाती के साफे को खपट्टा कहते है।

👉गोटे के प्रकार-
1. लप्पा
2. लप्पी
3. किरण
4. बांकड़ी
5. नोदाणी
6. सतदानी
7. बिजिया

👉गोटा उद्योग-
➯राजस्थान में गोटा उद्योग खण्डेला (सीकर) का प्रसिद्ध है।

👉लुगड़ा-
➯राजस्थान में लुगड़ा पाटोदा (सीकर) का प्रसिद्ध है।

👉बंधेज-
➯राजस्थान में बंधेज का सर्वाधिक कार्य सुजानगढ़ (चूरू) में किया जाता है।
➯राजस्थान में बंधेज की सबसे बड़ी मंडी जोधपुर में स्थित है।

👉पगड़ी-
➯पगड़ी को प्रतिष्ठा का प्रतीक माना जाता है।
➯पगड़ी को पागा तथा पेचा भी कहते है।
➯राजस्थान में पगड़ी उदयपुर जिले की प्रसिद्ध मानी जाती है।
➯विश्व की सबसे बड़ी पगड़ी बागौर संग्रहालय (उदयपुर) में रखी हुई है।

👉चपटी-
➯उदयपुर की पगड़ी को चपटी कहते है।

👉खूंटेदार-
➯जयपुर की पगड़ी को खूंटेदार कहते है।

👉छज्जादार-
➯मारवाड़ा की पगड़ी को छज्जादार कहते है।

👉छाबदार-
➯मेवाड़ में पगड़ी बांधने वाले को छाबदार कहते है।

👉केसरिया पगड़ी-
➯केसरिया पगड़ी केवल राजा के द्वारा ही पहनी जाती थी।

👉कसूमल रंग की पगड़ी-
➯कसूमल रंग की पगड़ी युद्ध के समय पहनी जाती थी।

👉लाल रंग की लहरीदार पगड़ी-
➯लाल रंग की लहरीदार पगड़ी राजघराने के लोगो के द्वारा पहनी जाती थी।

👉पगड़ी के प्रकार-
1. उदयशाही
2. जसवंतशाही
3. भिमशाही
4. डुगरशाही
5. राजशाही
6. मंदिल



👉साफा-
➯राजस्थान में साफा जोधपुर जिले का प्रसिद्ध है।

👉जोधपुरी कोट पेन्ट-
➯जोधपुरी कोट पेन्ट को राष्ट्रीय पौशाक का दर्जा दिया गया है।

👉पंच रंग पाग-
➯पंच रंग पाग का शुभ अवसरों पर पहना जाता है।

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राजस्थान की वेशभूषा राजस्थान की वेशभूषा Reviewed by asdfasdf on August 08, 2018 Rating: 5

राजस्थान के प्रमुख रीति रिवाज

August 07, 2018
जन्म से पहले के संस्कार /रीति रिवाज/ रस्मे
👉जन्म से पहले के संस्कार-
➯जन्म से पहले सम्पन होने वाले संस्कार या रीति रिवाज कुल 3 है जैसे-
1. गर्भाधारण
2. पुंसवन
3. सीमंतो नयन (सिमन्तोउन्नयन)

जन्म से संबंधित संस्कार/ रीति रिवाज/ रस्मे
👉जन्म के संबंधित संस्कार-
1. गर्भाधारण
2. पंचमासी
3. अठमासी
4. जन्म या जातकर्म
5. नामकरण
6. पनघट पूजा/ कुआ पूजन/ जलवा पूजन
7. जडूला/ मुंडन
8. सुवाहड़ा
9. कौथला

👉पनघट पूजा/कुआ पूजन/ जलवा पूजन-
➯बच्चे के जन्म के कुछ दिनों बाद या सवा महिने बाद पनघट/ कुआ पूजन की जाती है जिसे जलवा पूजन भी कहते है।

👉जडूला/ मुंडन-
➯बच्चे के जन्म के 2 या 3 वर्ष बाद जब पहली बार बच्चे के बाल काटे जाते है उसे जडूला उतारना या मुंडन कहते है।

👉सुवाहड़ा-
➯जच्चा (बच्चे की माँ) को सौंठ, अजवाईन, घी तथा खांड के लड्डू बनाकर देना ही सुवाहड़ा कहलाता है।

👉कौथला-
➯बेटी के पहले प्रसव होने पर उसके पीहर वालों द्वारा जवांई तथा जवांई के संबंधियों को भेंट देना ही कौथला कहलाता है।

जन्म के बाद के संस्कार/ रीति रिवाज/ रस्मे
👉जन्म के बाद के संस्कार-
1. उपनयन संस्कार
2. समावर्तन संस्कार

1. उपनयन संस्कार-
➯उपनयन संस्कार को यज्ञोपवित संस्कार भी कहते है।
➯उपनयन संस्कार में बालक की शिक्षा का प्रारम्भ होता है। या बालक को गुरु के पास शिक्षा के लिए भेजा जाता है।
➯उपनयन संस्कार ब्राह्मण, क्षत्रिय व वैश्य इन तीनों वर्णो को प्राप्त है लेकिन शूद्र वर्ण को प्राप्त नहीं है।

2. समावर्तन संस्कार-
➯समावर्तन संस्कार में बालक की शिक्षा का समापन होता है।

विवाह से संबंधित संस्कार/ रीति रिवाज/ रस्मे
👉विवाह के संस्कार-
1. बरी पड़ला
2. पहरावणी/ रंगबरी (समठुणी)
3. सामेला/ मधुपर्क (गोरवा लेना)
4. बढ़ार
5. बिनोटा
6. हथलेवा/ पाणिग्रहण संस्कार
7. हलदायत की पूजा/ गणेश पूजा
8. औलंदी
9. पैसारो
10. मुकलावा/ गोना
11. चवरी छाना
12. रीत
13. सोटा-सोटी
14. सिंजारा
15. रियाण
16. लीला मोरिया

👉बरी पड़ला-
➯वर पक्ष की तरफ से वधु के लिए वस्त्र एवं मिठाई भेजना ही बरी पड़ला कहलाता है।

👉पहरावणी/ रंगबरी (समठुणी)-
➯बारात विदाई (समठुणी) के समय वधु के पिता द्वारा प्रत्येक बाराती को उपहार स्वरूप भेंट प्रदान करना ही पहरावणी/ रंगबरी कहलाता है।

👉सामेला/ मधुपर्क-
➯वधु का पिता अपने सगे संबंधियों के साथ बारात की अंगुवानी करना या स्वागत करना (गोरवा लेना) ही सामेला/ मधुपर्क कहलाता है।

👉बढ़ार-
➯सामूहिक प्रीतिभोज ही बढ़ार कहलाता है।

👉बिनोटा-
➯वर वधु के पैरों की जूतियां को बिनोटा कहते है।

👉हथलेवा/ पाणिग्रहण-
➯फेरो के मंडप में वर व वधु के हाथ मिलाना ही हथलेवा/ पाणिग्रहण संस्कार कहलाता है।

👉हलदायत की पूजा/ गणेश पूजा-
➯वर व वधु को पिठी लगना या वर व वधु का बाण/बान बैठाना ही हलदायत की पूजा/ गणेश पूजा कहलाता है।

👉औलंदी-
➯वधु जब पहली बार अपने ससुराल आती है उस समय वधु के साथ आने वाला वधु का भाई या रिश्तेदार ही औलंदी कहलाता है।

👉पैसारो-
➯वधु जब पहली बार ससुराल आती है तो घर के मुख्य दरवाजे पर सात थाली (6 थाली व 1 कचोला) रखी जाती है, वर इन थालियों को इधर-उधर करता है तथा वधु इन थालियों को इकठा करती है इसी परम्परा को ही पैसारो कहते है।

👉मुकलावा/ गोना-
➯अवयस्क विवाहित कन्या को वयस्क हो जाने पर उसे ससुराल भेज जाता है इसी परम्परा को ही मुकलावा/ गोना कहते है।

👉चवरी छाना-
➯फेरो के मंडप को चवरी छाना कहा जाता है।

👉रीत-
➯गोद भराई की रस्म को रीत कहते है।

👉सोटा-सोटी-
➯विवाहोपरान्त दूल्हा व दुल्हन के द्वारा लकड़ी (सोटी) से खेले जाने वाला खेल ही सोटा-सोटी कहलाता है।

👉सिंजारा-
➯वह पर्व (त्योहार) जिसमें पुत्री एवं पुत्रवधु के लिए साड़ी, श्रृंगार सामग्री व मिठाई आदि भेजे जाते है सिंजारा कहलाता है।

👉रियाण-
➯पश्चिमी राजस्थान में विवाह के दुसरे दिन अफीम पिलाकर मेहमानों का सम्मान करना रियाण कहलाता है।

👉लीला मोरिया-
➯लीला मोरिया आदिवासियों की वैवाहिक रस्म है।

शोक/ मृत्यु से संबंधित संस्कार/ रीति रिवाज/ रस्मे
👉मृत्यु के संस्कार-
1. बखेर
2. आधेटा/ आधेठा/ आघेटा
3. पिंडदान
4. लौपा देना
5. सांतरवाड़ा
6. औसर/ मौसर/ नुक्ता/ काज/ खर्च
7. भदर
8. जौसर
9. कांधिया/ कांदिया
10. बैकुण्डी
11. लोकाई

👉बखेर-
➯शव यात्रा के दौरान शव के उपर से पैसे, खील, पतासा, रूई, मूंगफली आदि फेकना ही बखेर कहलाता है।

👉आधेटा/ आधेठा/ आघेटा-
➯शव यात्रा के दौरान कांधियों की दिशा परिवर्तित करना ही आधेटा कहलाता है।

👉पिंडदान-
➯कांधियों की दिशा परिवर्तित करते समय पशु पक्षियों के लिए अनाज का पिंड रखना ही पिंडदान कहलाता है।

👉लोपा देना-
➯चिता में आग देना ही लोपा देना कहलाता है।

👉सांतरवाड़ा/सातवाड़ा-
➯दाहसंस्कार के बाद स्नान करना या हाथ पैर धोना ही सांतरवाड़ा कहलाता है। या अंत्येष्ठि क्रिया में गये हुये व्यक्तियों के द्वारा स्नान कर के मृतक व्यक्ति के घर जाकर उसके रिश्तेदारों को सांत्वना देना सातरवाड़ा कहलाता है।

👉औसर/ मौसर/ नुक्ता/ काज/ खर्च-
➯मृत्यु भोज ही औसर/ मौसर/ नुक्ता/ काज/ खर्च कहलाता है।

👉भदर-
➯कांधियों का सिर मुंडवाना , दाड़ी, मूछे कटवाना ही भदर कहलाता है।

👉जौसर-
➯किसी व्यक्ति द्वारा जीते जी अपना काज/ खर्च करवाना ही जौसर कहलाता है।



👉कांधिया/ कांदिया-
➯अर्थी/ बैकुण्डी/ शव को ले जाने वाले चार व्यक्तियों को कांधिया/ कांदिया कहते है।

👉बैकुण्डी-
➯बांस या लकड़ी की तैयार की जाने वाली अर्थी को बैकुण्डी कहते है।

👉लोकाई-
➯लोकाई आदिवासियों की शोक/मृत्यु से संबंधित रस्मे है।

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राजस्थान के प्रमुख रीति रिवाज राजस्थान के प्रमुख रीति रिवाज Reviewed by asdfasdf on August 07, 2018 Rating: 5
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